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आर्म्स एक्ट में संशोधन के दो साल बाद पहली सजा
उज्जैन कोर्ट ने पहली बार हाथ में चाकू या अन्य हथियार लेकर घूमने पर तीन साल की सजा सुनाई। लंबे अरसे के बाद शुरू हुए ट्रायल में कोर्ट ने आरोपियों को सजा देना शुरू कर दिया है।
सात माह पहले 6 मार्च को नृससिंह घाट के सामने राजा उर्फ विक्रम पुत्र रायसिंह, निवासी गणेश कॉलोनी जयसिंहपुरा अपने हाथ में एक बड़ा छुरा लेकर घूम रहा था। पुलिस ने उसे चाकू के साथ गिरफ्तार कर लिया था। महाकाल थाना पुलिस को उसके पास से छुरे का लाइसेंस नहीं मिला था। तब पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया था। एडीपीओ कमलेश श्रीवास ने कोर्ट में यह साबित किया कि राजा का उद्देश्य इस चाकू से अपराध करना था। इस पर सहमत होकर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विनायक गुप्ता की कोर्ट ने राजा को धारा 25 आर्म्स एक्ट में 3 साल का कठोर कारावास और 500 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।
यह है संशोधन और सजा का प्रावधान –
अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी मुकेश कुमार कुन्हारे ने बताया कि गृह मंत्री अमित शाह ने 29 नवंबर, 2019 को लोकसभा में आर्म्स (संशोधन) बिल, 2019 पेश किया। बिल आर्म्स एक्ट, 1959 में संशोधन करने का प्रयास करता है। कोई व्यक्ति कितनी लाइसेंसशुदा बंदूकें रख सकता है, बिल उस संख्या को कम करता है, साथ ही एक्ट के अंतर्गत कुछ अपराधों की सजा बढ़ाता है। बिल में अपराधों की नई श्रेणियों को भी प्रस्तावित किया गया है।
एक्ट के अंतर्गत लाइसेंस के बिना प्रतिबंधित अस्त्र-शस्त्र (एम्यूनिशन) खरीदने, अपने पास रखने या कैरी करने पर पांच से दस साल की कैद हो सकती है और जुर्माना भरना पड़ सकता है। बिल इस सजा को जुर्माने सहित सात से 14 साल करता है। अदालत कारण बताकर इस सजा को सात साल से कम कर सकती है।