- संत रविदास जयंती पर उज्जैन में एक साथ जुटे संत और समाज, 2121 दीपकों की रोशनी में जगमगाया शिप्रा तट
- महाकाल मंदिर पहुंचीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष अल्का लांबा, मीडिया से बोलीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष— नाम में भगवान जोड़ना काफी नहीं, सवाल ये है कि काम क्या किया जा रहा है
- उज्जैन में शिप्रा आरती को मिलेगा नया स्वरूप, रामघाट को वैश्विक पहचान देने की तैयारी; रोज होने वाली शिप्रा आरती बनेगी धार्मिक पर्यटन का केंद्र
- सुबह की पहली घंटी के साथ खुले महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा राजा स्वरूप
- महाकाल दरबार में भस्म आरती की अलौकिक छटा: सभा मंडप से गर्भगृह तक विधिविधान के साथ संपन्न हुई आराधना, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
फायदेमंद मावठा:किसान बोले- पलेवा नहीं करने से पानी और मोटर पंप बंद रहने से बिजली की बचत
रबी की तैयारी में जुटे किसानों को मावठे ने राहत दी है। उनकी तीन तरह से बचत होगी। सोयाबीन की कटाई के बाद असिंचित क्षेत्र के किसान भी चना, गेहूं की बोवनी का मन बना रहे हैं। उनका कहना है कि हर बार सोयाबीन की कटाई के बाद खेतों से नमी चली जाती है या इतनी कम हो जाती है कि उन्हें सिंचाई के संसाधनों का उपयोग करना पड़ता है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में 90 फीसदी से ज्यादा सोयाबीन की कटाई हो गई है। इसके बाद किसानों ने अपने स्तर पर रबी फसल की बोवनी के लिए खेतों की तैयारी शुरू कर दी है।
घंटे में तीन डिग्री गिरा तापमान
मावठे ने दिन के तापमान में गिरावट दर्ज करवाई है। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अनुसार चौबीस घंटे में दिन के तापमान में 3 डिग्री कमी आई है। सोमवार को अधिकतम तापमान 30.5 और न्यूनतम 22.4 डिग्री दर्ज किया गया। चौबीस घंटे में 3 मिमी बारिश हुई है। दोपहर तक बादल छाए। उसके बाद तेज धूप भी निकली।
मावठा गिरने के फायदे… ऐसे समझें किसानों की तीन प्रकार से कैसे होगी बचत
1. मावठा गिरने के फायदे… ऐसे समझें1 सिंचाई के लिए पानी बचेगा : सोयाबीन की कटाई के एक-दो सप्ताह बाद किसान रबी की तैयारी में जुट जाते हैं। चिंतामण जवासिया के किसान ईश्वरसिंह पाटपाला का कहना है मावठे के कारण वर्तमान में खेतों में पर्याप्त नमी है। ऐसे में पलेवा के लिए उन्हें अतिरिक्त सिंचाई करने की जरूरत नहीं है। यह पानी भविष्य में काम आएगा।
2 . बिजली की बचत होगी : पलेवा के लिए कुएं और बोरवेल से पानी खींचने के लिए बड़ी संख्या में किसान मोटर पंप चलाते हैं। ऐसे में एक साथ बड़ी संख्या में मोटर पंप चलाने से बिजली की खपत भी अचानक बढ़ जाती है। वर्तमान में मोटर पंप चलाने की जरूरत नहीं होने से बिजली की खपत भी कम होगी।
3. डीजल की खपत घटेगी : सोयाबीन कटाई के बाद खेतों की तैयारी के लिए एक बार रोटावेटर, कल्टीवेटर चलाने से राहत मिल सकती है। किसानों का कहना है कि मावठे के कारण खेतों में आई नमी के बाद वे सीधे बोवनी भी कर सकते हैं। इससे उनके डीजल की भी बचत हुई है। हर बार सीजन में उन्हें बड़ी मात्रा में डीजल खरीदना पड़ता है। किसानों की तीन प्रकार से कैसे होगी बचत।