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संतरे की बंपर पैदावार, किसानों के लिए बनी मुसीबत
उज्जैन। फल मंडी में संतरे की बहार आई हंै। आसपास के क्षेत्रों से प्रतिदिन क्विंटलों में संतरा बिकने पहुंच रहा है लेकिन भाव नहीं मिलने से किसान औने-पौने दामों में संतरा बेचकर जा रहे हैं। किसानों का कहना है इस बार संतरे की आवक अच्छी है लेकिन बाजार में उठाव नहीं होने से हमें २ एवं ३ रुपये और अच्छा संतरा हो, तो व्यापारी को ५ रुपये किलो में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। आमतौर पर २५ से ३० रुपये किलो बिकने वाले संतरे के दाम किसानों को बमुश्किल ५ रुपए किलो भी नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि बड़े शहरों में यही संतरा ७० से १०० प्रतिकिलो के भाव बिकता है। किसानों के बगीचे व्यापारी नहीं खरीद रहे हैं और संतरा पूरी तरह से पक चुका है। अगर एक सप्ताह में संतरा नहीं बिका, तो पूरी फसल जमीन पर गिरकर बर्बाद हो जाएगी
गुरुवार सुबह चिमनगंज स्थित फल मंडी पहुंचे सारंगपुर के किसान रघुनाथ ने बताया आज ट्रैक्स भरकर संतरा लाया हूं लेकिन लागत भी नहीं निकल रही। गाड़ी का किराया और मजदूरों की मजदूरी भी नहीं दे पा रहा हूं।
वहीं व्यापारी कम भाव का बताकर माल खरीद लेते हैं और बाजार में २० रुपये से ४० रुपये किलो तक वही संतरा बेच देते हैं। वहीं फतेहपुर मेंढकी के बद्रीलाल ने भाव काफी कम मिल रहे हैं। लागत भी नहीं निकल पा रही है।
लगातार तीन सालों से नुकसान: यह लगातार तीसरा साल है जिसमें संतरे की खेती करने वाले किसान भारी नुकसान उठा रहे हैं। साल २०१५ में किसानों को संतरा सड़क पर फेंकना पड़ा था, तब भाव ५० पैसे किलो भी नहीं मिल पाया था। २०१६ में ओलावृष्टि से फसल नष्ट हो गई थी और इस साल वापस भाव जमीन पर है। ३० साल पहले इलाके में संतरे की खेती की शुरुआत हुई जिसका पौधा नागपुर, महाराष्ट्र से लाया गया था। इस क्षेत्र की मिट्टी और पर्यावरण संतरा खेती के लिए उपयुक्त है जिसकी वजह से इसका उत्पादन इतना अधिक होता है।