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साल का आखिरी पूर्ण चंद्रग्रहण आज: उज्जैन सहित प्रदेश के मंदिरों में पूजा-अर्चना की व्यवस्था बदली, 3 घंटे 28 मिनट तक रहेगा ग्रहण!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
साल 2025 का दूसरा और अंतिम पूर्ण चंद्रग्रहण आज रविवार, 7 सितंबर की रात को लग रहा है। भाद्रपद पूर्णिमा पर होने वाले इस खगोलीय घटना का शुभारंभ भारतीय समयानुसार रात 9:56 बजे से होगा। चंद्रग्रहण का मध्यकाल 11:41 बजे और समापन 1:26 बजे पर होगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 28 मिनट की रहेगी।
कहां-कहां दिखाई देगा ग्रहण
भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा यह ग्रहण एशिया, हिंद महासागर, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अंटार्कटिका और प्रशांत महासागर क्षेत्र में भी देखा जा सकेगा। खगोलविदों के अनुसार इस दौरान चंद्रमा का लगभग 136.8 प्रतिशत भाग पृथ्वी की छाया से ढका हुआ नजर आएगा।
चंद्रग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो चुका है। यानी दोपहर 12:56 बजे से सूतक लग गया है और यह ग्रहण समाप्ति तक जारी रहेगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दौरान मंदिरों में पूजा-अर्चना और दर्शन की व्यवस्थाओं में बदलाव किए जाते हैं।
चंद्रग्रहण क्यों होता है?
चंद्रग्रहण तब होता है, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा आंशिक, पूर्ण या उपछाया रूप में ढका हुआ दिखाई देता है।
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आंशिक चंद्रग्रहण: जब चंद्रमा का केवल कुछ हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढकता है।
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पूर्ण चंद्रग्रहण: जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया में आ जाता है और लालिमा लिए चमकता है।
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उपछाया चंद्रग्रहण: जब चंद्रमा पर केवल हल्की छाया पड़ती है और उसका आभास धुंधला नजर आता है।
उज्जैन में बदली व्यवस्थाएं
धार्मिक नगरी उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में पूजा-पद्धति में बदलाव किया गया है।
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महाकाल मंदिर:
सामान्यत: रात 10:30 बजे होने वाली शयन आरती आज एक घंटे पहले 9:30 बजे आयोजित की गई। आरती के बाद 9:56 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए गए। ग्रहण खत्म होने के बाद मंदिर को धोकर शुद्धिकरण किया जाएगा और फिर भगवान का विशेष श्रृंगार कर आरती होगी। -
मंगलनाथ मंदिर:
यहां रविवार को होने वाली भात पूजन दोपहर 11 बजे तक ही हुई। इसके बाद गर्भगृह में किसी का प्रवेश नहीं हुआ। ग्रहण काल में पट बंद रहने के बाद अगले दिन मंगला आरती के साथ पूजा क्रम फिर से शुरू होगा। -
हरसिद्धि माता मंदिर:
सूतक शुरू होने से पहले ही माता की आरती संपन्न कराई गई। ग्रहण काल में मूर्ति स्पर्श पूरी तरह वर्जित रहा। श्रद्धालुओं को बाहर से ही दर्शन की अनुमति रही। सोमवार सुबह 5 बजे मंदिर धोकर शुद्धिकरण के बाद आरती और श्रृंगार होगा। -
गोपाल मंदिर और सांदीपनि आश्रम:
यहां रविवार दोपहर सूतक से पहले ही विशेष पूजन-अर्चना कर ली गई। इसके बाद 12:58 बजे से पट बंद कर दिए गए।
प्रदेश के अन्य मंदिरों में स्थिति
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नलखेड़ा का मां बगलामुखी मंदिर:
यहां चंद्रग्रहण के दौरान मंदिर पूर्णत: बंद रहा। श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति नहीं दी गई। -
मैहर मां शारदा मंदिर:
ग्रहण काल में मां को भोग नहीं लगाया गया। हालांकि पट बंद नहीं हुए और भक्तों को दर्शन की अनुमति रही। अगले दिन प्रातःकालीन पूजा-अर्चना और भोग प्रसाद के साथ पूजा पुनः आरंभ होगी। -
इंदौर का खजराना गणेश मंदिर:
यहां दोपहर 12:57 बजे से श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। ग्रहण खत्म होने के बाद शुद्धिकरण के उपरांत दर्शन शुरू होंगे। -
दतिया का पीतांबरा मंदिर:
यहां ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और दर्शन की सामान्य व्यवस्था जस की तस रही।