- महाकाल मंदिर की सुरक्षा पर संसद में उठी आवाज: राज्यसभा सांसद बोले- बढ़ती भीड़ के बीच CISF जैसी व्यवस्था जरूरी, हाईटेक सिस्टम की मांग
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महाकाल मंदिर की सुरक्षा पर संसद में उठी आवाज: राज्यसभा सांसद बोले- बढ़ती भीड़ के बीच CISF जैसी व्यवस्था जरूरी, हाईटेक सिस्टम की मांग
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच अब मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद बालयोगी डॉ. उमेशनाथ महाराज ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में महाकाल मंदिर और उससे जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को और मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि जिस तेजी से यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है, उसे देखते हुए अब केवल स्थानीय स्तर की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और आधुनिक तकनीकों की जरूरत महसूस हो रही है।
सांसद ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि देश में सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में पिछले कुछ वर्षों में बड़े स्तर पर काम हुआ है, जिसमें उज्जैन का महत्व और भी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि महाकाल मंदिर, भस्म आरती, शिप्रा नदी के घाट और सिद्धवट जैसे स्थानों पर प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में इन सभी स्थलों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना अनिवार्य है, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या खतरे की संभावना को समय रहते रोका जा सके।
यह मांग पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया भी महाकाल मंदिर की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार से विशेष व्यवस्था की मांग कर चुके हैं। उन्होंने लोकसभा में यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि महाकाल लोक के विकसित होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और अधिक संवेदनशील हो गई है। उन्होंने सुझाव दिया था कि मंदिर परिसर की सुरक्षा को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जाए और इसके लिए CISF जैसी केंद्रीय एजेंसी की तैनाती पर विचार किया जाए।
वर्तमान परिदृश्य में, जहां उज्जैन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, वहीं सुरक्षा व्यवस्था को भी उसी स्तर पर उन्नत करना आवश्यक माना जा रहा है। खासकर सिंहस्थ 2028 जैसे विशाल आयोजन को देखते हुए प्रशासन और सरकार के सामने यह एक बड़ी चुनौती है कि श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा दोनों का संतुलन बनाए रखा जाए।