- सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज, इंदौर-देवास से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग पार्किंग और रूट प्लान तैयार करने के निर्देश; संभागायुक्त बोले- घाट निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं, समयसीमा में काम पूरा करें
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सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज, इंदौर-देवास से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग पार्किंग और रूट प्लान तैयार करने के निर्देश; संभागायुक्त बोले- घाट निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं, समयसीमा में काम पूरा करें
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां अब तेज रफ्तार पकड़ चुकी हैं और प्रशासन हर स्तर पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुट गया है। इसी कड़ी में रविवार (12 अप्रैल) सुबह संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने त्रिवेणी स्थित श्री शनि मंदिर क्षेत्र में निर्माणाधीन घाटों और श्रद्धालुओं की आवाजाही से जुड़ी व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर न केवल घाट निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया, बल्कि उन मार्गों को भी देखा जिनसे होकर लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए घाटों तक पहुंचेंगे।
इंदौर-देवास से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग पार्किंग और रूट प्लान तैयार करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इंदौर-देवास दिशा से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, आवागमन और घाट तक पहुंचने की पूरी व्यवस्था माइक्रो प्लानिंग के तहत पहले से तय की जाए। उन्होंने कहा कि बिना तय रूट और पार्किंग प्लान के घाटों पर अंतिम संरचनाएं तैयार न की जाएं, ताकि सिंहस्थ के दौरान भीड़ और यातायात को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके।
29 किलोमीटर लंबे नए घाटों का निर्माण, 1.5 KM हिस्से का किया निरीक्षण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सिंहस्थ 2028 को विश्वस्तरीय बनाने के उद्देश्य से शिप्रा नदी के किनारे 29 किलोमीटर लंबाई में नए घाट विकसित किए जा रहे हैं। इसी के तहत नमामि शिप्रा परियोजना की इकाई क्रमांक-02 में जल संसाधन विभाग द्वारा लगभग 1.5 किलोमीटर क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने निर्माण की प्रगति और आगामी कार्यों की जानकारी भी दी।
घाट तक पहुंचने वाले रास्तों का पैदल निरीक्षण, समन्वित प्लानिंग पर जोर
अधिकारियों ने घाटों तक पहुंचने वाले मार्गों का पैदल भ्रमण कर जमीनी स्थिति का आकलन किया। संभागायुक्त ने पुलिस और ट्रैफिक विभाग को निर्देशित किया कि पार्किंग, रूट और घाट पर उतरने की व्यवस्था एकीकृत योजना के तहत तैयार की जाए। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम होगी और अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनेगी।
VIP घाट का भी निरीक्षण, भीड़ और ट्रैफिक मैनेजमेंट की दीर्घकालिक योजना पर फोकस
सिंहस्थ 2016 में निर्मित वीआईपी घाट का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने माना कि सिंहस्थ के दौरान ही नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी यहां भीड़ का दबाव रहेगा। इसे ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
गुणवत्ता और समयसीमा पर सख्ती, बारिश से पहले काम पूरा करने के निर्देश
संभागायुक्त ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही वर्षा ऋतु को देखते हुए निर्माण कार्यों की गति बढ़ाकर उन्हें तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए।
प्रति घंटे कितने श्रद्धालु कर सकेंगे स्नान, इसका भी होगा वैज्ञानिक आकलन
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में एक अहम कदम के रूप में अधिकारियों को यह निर्देश भी दिए गए कि शिप्रा घाटों पर प्रति घंटे कितने श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकते हैं, इसका आंकलन कर विस्तृत योजना बनाई जाए। इसके साथ ही पार्किंग स्थलों की क्षमता का भी मूल्यांकन करने को कहा गया है, ताकि एक समय में कितने वाहनों को व्यवस्थित रूप से पार्क किया जा सके, यह पहले से तय हो सके।
निरीक्षण के दौरान उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का मानना है कि इन सभी तैयारियों और सटीक प्लानिंग के जरिए सिंहस्थ 2028 को सुव्यवस्थित और सफल बनाया जा सकेगा।