- सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का संत करेंगे निरीक्षण: स्वामी माधवाचार्य डाकोर के नेतृत्व में दोपहर 2 बजे उज्जैन पहुंचेगा प्रतिनिधिमंडल, अखाड़ों और श्रद्धालु सुविधाओं का होगा जायजा
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सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का संत करेंगे निरीक्षण: स्वामी माधवाचार्य डाकोर के नेतृत्व में दोपहर 2 बजे उज्जैन पहुंचेगा प्रतिनिधिमंडल, अखाड़ों और श्रद्धालु सुविधाओं का होगा जायजा
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर उज्जैन में धार्मिक और प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। इसी क्रम में गुरुवार को वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख संतों का एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल उज्जैन पहुंचेगा, जो सिंहस्थ क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों, व्यवस्थाओं और तैयारियों का निरीक्षण करेगा। इस दौरे को आगामी सिंहस्थ कुंभ की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें देशभर के कई बड़े संत, महामंडलेश्वर और अखाड़ों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल रहेंगे।
जानकारी के अनुसार, अखिल भारतीय खालसा परिषद के अध्यक्ष और रामानंद संप्रदाय के प्रमुख संत टीला द्वारा गाद्याचार्य मंगल पीठाधीश्वर यज्ञ सम्राट श्री स्वामी माधवाचार्य डाकोर के नेतृत्व में यह संत प्रतिनिधिमंडल गुरुवार दोपहर लगभग 2 बजे उज्जैन पहुंचेगा। वैष्णव संप्रदाय के तीन अणी अखाड़ों के अंतर्गत आने वाले करीब 700 खालसों के अध्यक्ष होने के नाते स्वामी माधवाचार्य का यह दौरा धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।
बताया जा रहा है कि उज्जैन आगमन के बाद संत मंडल सबसे पहले विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगा, जहां भगवान महाकाल के दर्शन और पूजन के बाद आगामी सिंहस्थ की मंगल कामना की जाएगी। इसके पश्चात प्रतिनिधिमंडल सिंहस्थ क्षेत्र का दौरा करेगा और वहां चल रहे निर्माण एवं अधोसंरचना विकास कार्यों का निरीक्षण करेगा।
संतों का यह दल विशेष रूप से श्रद्धालुओं की सुविधाओं, अखाड़ों की व्यवस्थाओं, साधु-संतों के ठहराव, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और कुंभ क्षेत्र में विकसित की जा रही मूलभूत सुविधाओं को लेकर जानकारी लेगा। प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता पर भी चर्चा की जाएगी।
पवासा स्थित श्री हजारी हनुमान मंदिर के महंत काशीदास महाराज ने बताया कि संतों का प्रतिनिधिमंडल सिंहस्थ क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण करेगा और इसके बाद जिला प्रशासन एवं मेला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक भी आयोजित की जाएगी। इस दौरान कलेक्टर, मेला अधिकारी सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहेंगे। बैठक में कुंभ आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं, संतों की आवश्यकताओं और विभिन्न सुझावों पर चर्चा होने की संभावना है।
धार्मिक दृष्टि से यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन में अखाड़ों और संत समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में वैष्णव संप्रदाय के शीर्ष संतों द्वारा स्वयं तैयारियों का निरीक्षण करना प्रशासन के लिए भी एक अहम प्रक्रिया माना जा रहा है।
इस प्रतिनिधिमंडल में देश के अलग-अलग हिस्सों से कई प्रमुख संत और महामंडलेश्वर शामिल होंगे। इनमें रामादल अखाड़ा परिषद उज्जैन के अध्यक्ष महंत डॉ. रामेश्वर दास, महंत भगवानदास, भोपाल गुफा मंदिर के महामंडलेश्वर राम प्रवेश दास महाराज, जगन्नाथ पुरी के महामंडलेश्वर रामकृष्ण दास महाराज, भावनगर के महामंडलेश्वर गरीबदास महाराज, नासिक के महंत भक्ति दास महाराज, इंदौर के महामंडलेश्वर राधे-राधे बाबा, बांसवाड़ा के महामंडलेश्वर हरिओम दास, बनारस के महामंडलेश्वर रामलोचन दास महाराज, नडियाद के महंत महावीर दास महाराज और इंदौर पंचकुइया के महामंडलेश्वर राम गोपाल दास महाराज शामिल रहेंगे।
इसके अलावा तेरह भाई त्यागी अयोध्या के महामंडलेश्वर बृजमोहन दास महाराज, महात्यागी कैंप अयोध्याजी के महामंडलेश्वर सीताराम दास तथा श्री हजारी हनुमान मंदिर उज्जैन के श्री महंत काशीदास महाराज भी इस दौरे का हिस्सा रहेंगे।
सिंहस्थ-2028 को विश्वस्तरीय स्वरूप देने के लिए राज्य सरकार और प्रशासन पहले से ही विभिन्न परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहे हैं। ऐसे में संत समाज की सहभागिता और सुझावों को आगामी तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुरुवार का यह दौरा प्रशासनिक तैयारियों और धार्मिक समन्वय के लिहाज से एक बड़ी बैठक के रूप में देखा जा रहा है।