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शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन के शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 1000 लीटर से ज्यादा तेल चढ़ा; घाटों से हटाए गए कपड़े और जूते-चप्पल
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में शनिचरी अमावस्या के विशेष संयोग ने शनिवार को श्रद्धा और परंपरा का अनोखा दृश्य प्रस्तुत किया। त्रिवेणी स्थित प्राचीन शनि मंदिर में तड़के से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था और दिनभर मंदिर परिसर व घाटों पर भक्तों की भीड़ बनी रही। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान शनिदेव के दर्शन कर तेल अर्पित किया और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना की।
इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले त्रिवेणी घाट पर स्नान करने पहुंचे और फिर मंदिर में पहुंचकर शनिदेव को तेल चढ़ाया। परंपरा के अनुसार कई श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद घाट पर अपने कपड़े, जूते और चप्पल भी छोड़ दिए। धार्मिक आयोजन के समाप्त होने के बाद प्रशासन और नगर निगम ने व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाकर घाट क्षेत्र को व्यवस्थित किया।
24 घंटे में एक हजार लीटर से अधिक तेल चढ़ा
शनिचरी अमावस्या और शनि जयंती के विशेष संयोग के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही। मंदिर प्रशासन के अनुसार, बीते 24 घंटे के भीतर भगवान शनि को अर्पित किए गए तेल की मात्रा 1000 लीटर से अधिक दर्ज की गई है।
मंदिर प्रशासक कार्तिकेय सिंह सेंगर ने बताया कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए इस तेल की अनुमानित कीमत करीब एक लाख रुपए आंकी गई है। मंदिर में आने वाले भक्त अपने साथ तिल का तेल लेकर पहुंचे और धार्मिक परंपरा के अनुसार शनिदेव को समर्पित किया।
किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा मंदिर में जमा तेल
मंदिर में एकत्रित तेल का उपयोग भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। प्रशासन के मुताबिक, जमा हुए तेल को किसानों को बेचा जाएगा, जहां इसका उपयोग पशुओं से जुड़े कार्यों में किया जा सकेगा।
इस व्यवस्था से एक ओर जहां किसानों को उपयोगी संसाधन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर मंदिर को भी आय प्राप्त होगी। मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित सामग्री का व्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित किया जाता है ताकि संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो सके।
घाटों पर छूटे कपड़े और जूते-चप्पल, निगम ने चलाया सफाई अभियान
शनिचरी अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी घाट पर स्नान करने पहुंचे थे। स्नान के बाद धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए कई लोगों ने अपने कपड़े और जूते-चप्पल वहीं छोड़ दिए।
भीड़ कम होने के बाद नगर निगम की टीम ने घाट क्षेत्र में सफाई अभियान शुरू किया। निगम ने घाटों पर फैली सामग्री को हटाने के लिए करीब 90 सफाई कर्मचारियों को लगाया। कर्मचारियों ने घाटों और आसपास के क्षेत्रों से कपड़े, चप्पल और अन्य छोड़ी गई वस्तुओं को एकत्र किया।
पुराने कपड़ों से बनेंगे उपयोगी सामान
नगर निगम के अनुसार, घाटों से एकत्र किए गए कपड़ों का दोबारा उपयोग किया जाएगा। इन कपड़ों से फाइल कवर सहित अन्य उपयोगी वस्तुएं तैयार की जाएंगी।
इसके साथ ही जो कपड़े अच्छी स्थिति में पाए जाएंगे, उन्हें अलग रखकर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इस प्रक्रिया से धार्मिक आयोजन के दौरान छोड़ी गई सामग्री का उपयोगी रूपांतरण किया जा सकता है।
जूते-चप्पलों से बनेगा आरडीएफ ईंधन
घाटों से एकत्र हुए जूते-चप्पलों को भी सीधे नष्ट नहीं किया जाएगा। नगर निगम इन्हें मशीनों के माध्यम से प्रोसेस करेगा, जिसके बाद इन्हें आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) यानी ईंधन में बदला जाएगा।
इस ईंधन का उपयोग फैक्ट्रियों और बिजली उत्पादन इकाइयों में किया जा सकेगा। प्रशासन के अनुसार, यह तरीका कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ पर्यावरणीय उपयोगिता को भी बढ़ावा देता है।
उपयोग योग्य सामान जरूरतमंदों तक पहुंचेगा
नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो जूते-चप्पल और कपड़े अच्छी स्थिति में मिलेंगे, उन्हें अलग से सुरक्षित रखा जाएगा। बाद में इन्हें जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उपयोगी सामग्री बेकार न जाए और सामाजिक उपयोग में लाई जा सके।
शनिचरी अमावस्या के अवसर पर उज्जैन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने एक बार फिर त्रिवेणी शनि मंदिर की धार्मिक महत्ता को दर्शाया। वहीं आयोजन के बाद सामग्री के पुनः उपयोग और प्रबंधन की प्रक्रिया भी चर्चा का विषय बनी हुई है।