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महाकाल मंदिर का नंदी हॉल बदलेगा रूप, 20 लाख की लागत से होगा सौंदर्यीकरण; सावन से पहले पूरा करने की तैयारी
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं को जल्द ही नंदी हॉल का बदला हुआ स्वरूप देखने को मिल सकता है। मंदिर प्रशासन ने उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) के सहयोग से नंदी हॉल के सौंदर्यीकरण और संरचनात्मक सुधार की योजना पर काम शुरू कर दिया है। करीब 20 लाख रुपए की लागत से प्रस्तावित इस कार्य का उद्देश्य श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाना और हॉल की धार्मिक गरिमा को बनाए रखते हुए उसे अधिक व्यवस्थित रूप देना है।
मंदिर प्रशासन का अनुमान है कि यह पूरा काम सावन माह शुरू होने से पहले पूरा कर लिया जाएगा, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु नए स्वरूप में नंदी हॉल का अनुभव कर सकें।
एजेंसी तय, जल्द शुरू होगा काम
महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि नंदी हॉल के रिनोवेशन के लिए एजेंसी तय कर दी गई है। अब जल्द ही जमीनी स्तर पर कार्य शुरू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
उन्होंने बताया कि यह केवल सामान्य मरम्मत का काम नहीं होगा, बल्कि हॉल को अधिक व्यवस्थित, सौंदर्यपूर्ण और तकनीकी रूप से बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
पिलर कवर होंगे, वायरिंग और पाइपलाइन रहेंगी छिपी
योजना के अनुसार नंदी हॉल में मौजूद दोनों प्रमुख पिलरों को कवर किया जाएगा, जिससे हॉल का आंतरिक स्वरूप अधिक आकर्षक और व्यवस्थित दिखाई दे।
इसके अलावा अभी दिखाई देने वाली डक्टिंग, सीसीटीवी कैमरों से जुड़ी वायरिंग, इलेक्ट्रिक लाइन और पाइपलाइन को कंसील किया जाएगा। यानी इन सभी तकनीकी व्यवस्थाओं को इस तरह व्यवस्थित किया जाएगा कि वे श्रद्धालुओं की नजर में सीधे न आएं और हॉल का दृश्य अधिक साफ-सुथरा लगे।
प्रशासन का मानना है कि इससे नंदी हॉल की सौंदर्यात्मक प्रस्तुति बेहतर होगी और धार्मिक वातावरण अधिक प्रभावशाली महसूस होगा।
मार्बल की विशेष सफाई, पुरानी भव्यता को बनाए रखने पर जोर
नंदी हॉल में लगे मार्बल की भी विशेष सफाई करवाई जाएगी। इसके लिए अलग तकनीक और प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि वर्षों पुरानी चमक को फिर से उभारा जा सके।
साथ ही, पेंटिंग और अन्य संरक्षण कार्यों के माध्यम से हॉल के पारंपरिक स्वरूप और पुराने वैभव को बनाए रखने की कोशिश की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि काम का उद्देश्य केवल नया रूप देना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए सुविधाओं को उन्नत करना भी है।
मॉर्डन लुक के साथ धार्मिक स्वरूप कायम रखने की तैयारी
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, रिनोवेशन के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि नंदी हॉल को आधुनिक स्वरूप तो मिले, लेकिन उसकी धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान प्रभावित न हो।
श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की परंपरा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन और निर्माण कार्य किए जाएंगे, ताकि नया स्वरूप आधुनिकता और परंपरा के संतुलन के रूप में सामने आए।
भविष्य में फ्लोरिंग बदलने की भी योजना
प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में नंदी हॉल की फ्लोरिंग बदलने का कार्य भी किया जाएगा। हालांकि वर्तमान चरण में इसका क्रियान्वयन प्रस्तावित नहीं है, लेकिन इसे भविष्य की योजना का हिस्सा माना जा रहा है।
फ्लोरिंग में बदलाव का उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना और हॉल की सुंदरता को और बेहतर करना होगा।
नंदी प्रतिमा के आसपास दिखेगी चांदी की सजावट
नंदी हॉल के सौंदर्यीकरण के तहत एक विशेष आकर्षण भी जोड़ा जाएगा। नंदी प्रतिमा के सामने दोनों ओर दीवारों पर चांदी से जड़ित आकृतियां और मूर्तियां स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
इसके बाद पूरा क्षेत्र अधिक भव्य दिखाई देगा और नंदी हॉल में चांदी की चमक का विशेष प्रभाव नजर आएगा। मंदिर प्रशासन का मानना है कि यह बदलाव श्रद्धालुओं के लिए दृश्य और आध्यात्मिक अनुभव दोनों को बेहतर बनाएगा।
आरती और मंत्रोच्चार में इको खत्म करने के लिए होगा एकॉस्टिक ट्रीटमेंट
रिनोवेशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नंदी हॉल में एकॉस्टिक ट्रीटमेंट भी होगा। अभी आरती, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान हॉल में आवाज की गूंज (इको) महसूस होती है, जिससे ध्वनि स्पष्टता प्रभावित होती है।
इसी समस्या को दूर करने के लिए तकनीकी रूप से ध्वनि नियंत्रण का कार्य किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं को आरती और धार्मिक अनुष्ठानों का अनुभव अधिक स्पष्ट और प्रभावशाली रूप में मिलेगा।
सावन से पहले प्रस्तावित इस बदलाव को महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं में एक अहम सुधार के रूप में देखा जा रहा है। हर साल सावन में लाखों श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंचते हैं, ऐसे में नंदी हॉल का नया और व्यवस्थित स्वरूप उनके अनुभव को और विशेष बना सकता है।