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नागदा के सरकारी कॉलेजों के छात्रों ने परिणाम पर उठाए सवाल, 47 विद्यार्थियों को कम अंक और सप्लीमेंट्री मिलने पर विश्वविद्यालय में किया प्रदर्शन
नागदा के शासकीय स्वामी विवेकानंद कॉलेज और शासकीय गर्ल्स डिग्री कॉलेज के छात्र-छात्राएं अपने परीक्षा परिणाम को लेकर विक्रम विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए परिणामों की निष्पक्ष जांच की मांग की। विद्यार्थियों का कहना है कि बीकॉम द्वितीय वर्ष के बिजनेस स्टेटिस्टिक्स विषय में बड़ी संख्या में छात्रों को अपेक्षा से बेहद कम अंक दिए गए, जबकि कई विद्यार्थियों को शून्य अंक मिलने के कारण उन्हें सप्लीमेंट्री का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए परिणामों की दोबारा समीक्षा कराने की मांग रखी।
छात्रों के अनुसार 6 मई को आयोजित बिजनेस स्टेटिस्टिक्स की परीक्षा में शामिल होने वाले अधिकांश विद्यार्थियों ने पूरी तैयारी के साथ पेपर दिया था और उन्हें अपने प्रदर्शन पर पूरा भरोसा था। परिणाम घोषित होने के बाद जब अंकतालिका सामने आई तो कई छात्र हैरान रह गए। उनका कहना है कि जिन छात्रों को परीक्षा में पास होने की उम्मीद थी, उन्हें शून्य या बेहद कम अंक दिए गए, जिससे उनके शैक्षणिक भविष्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। इसी कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपनी शिकायत लेकर विश्वविद्यालय पहुंचे।
विद्यार्थियों ने बताया कि शासकीय स्वामी विवेकानंद कॉलेज के कुल 44 विद्यार्थियों में से 30 छात्रों को संबंधित विषय में सप्लीमेंट्री घोषित किया गया। उनका कहना है कि इनमें कई ऐसे छात्र भी शामिल हैं जिन्हें उत्तर पुस्तिका में शून्य अंक दर्ज किए गए हैं। छात्रों का दावा है कि उन्होंने परीक्षा के सभी प्रश्नों का उत्तर लिखा था, इसलिए इतने कम अंक मिलने की स्थिति उनके लिए समझ से परे है। इसी वजह से वे मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
इसी प्रकार शासकीय गर्ल्स डिग्री कॉलेज की छात्राओं ने भी परिणाम को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। छात्राओं का कहना है कि उनके कॉलेज की कई विद्यार्थियों को शून्य से लेकर केवल दो या तीन अंक तक ही प्राप्त हुए हैं। उनका मानना है कि यदि किसी एक या दो विद्यार्थियों के साथ ऐसा होता तो इसे सामान्य त्रुटि माना जा सकता था, लेकिन बड़ी संख्या में छात्रों के साथ समान स्थिति सामने आने से मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी कारण छात्राओं ने भी पुनर्मूल्यांकन और जांच की मांग की है।
प्रदर्शन के दौरान कुछ विद्यार्थियों ने परीक्षा संचालन को लेकर भी सवाल उठाए। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के समय एक निजी कॉलेज के विद्यार्थियों को विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। उनका कहना है कि परीक्षा केंद्र पर उन छात्रों को अनुचित तरीके से सहायता मिलने की शिकायत पहले भी की गई थी, लेकिन उस समय इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। छात्रों का मानना है कि यदि इस तरह की घटनाओं की निष्पक्ष जांच नहीं होगी तो ईमानदारी से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय होता रहेगा।
विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि उन्होंने पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान नियमित रूप से कक्षाओं में भाग लिया और परीक्षा की तैयारी गंभीरता से की थी। ऐसे में परिणाम आने के बाद शून्य या अत्यंत कम अंक मिलना उनके लिए मानसिक तनाव का कारण बन गया है। उनका कहना है कि यदि मूल्यांकन में किसी प्रकार की तकनीकी या मानवीय त्रुटि हुई है तो उसे समय रहते सुधारा जाना चाहिए, ताकि किसी भी छात्र का एक वर्ष प्रभावित न हो।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि संबंधित विषय की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराई जाए और जिन विद्यार्थियों को असामान्य रूप से कम अंक मिले हैं, उनके परिणामों की विशेष समीक्षा की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों या मूल्यांकन से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित कराना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उनका पक्ष सुना। कुलसचिव अनिल शर्मा ने बताया कि सरकारी कॉलेजों के छात्रों की ओर से कम अंक मिलने और परीक्षा से जुड़ी अन्य शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच के लिए परीक्षा नियंत्रक को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि सभी तथ्यों की निष्पक्ष तरीके से जांच की जा सके और वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
कुलसचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विश्वविद्यालय नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगा। यदि मूल्यांकन में किसी प्रकार की त्रुटि या प्रक्रिया संबंधी कमी पाई जाती है तो संबंधित नियमों के अनुसार आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। विश्वविद्यालय ने यह भी संकेत दिया कि छात्रों की शिकायतों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्राथमिकता के साथ देखा जाएगा।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर विद्यार्थियों की निगाहें विश्वविद्यालय की जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी शिकायतों का निष्पक्ष समाधान किया जाएगा और यदि किसी प्रकार की गलती हुई है तो उसे जल्द से जल्द सुधारा जाएगा। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी आवश्यक निर्णय नियमों के अनुरूप लिए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा हो सके और परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता बनी रहे।