- उज्जैन में गूंजेगा “नववर्ष का शंखनाद”, गुड़ी पड़वा पर महाकाल मंदिर में लहराएगा ब्रह्मध्वज
- उज्जैन में भूतड़ी अमावस्या पर उमड़ा आस्था का सैलाब, शिप्रा और 52 कुंड पर दिनभर रही भीड़
- चैत्र नवरात्रि इस बार खास: पंचक और ग्रहों के अनोखे संयोग से बढ़ेगा फल, ज्योतिषाचार्यों ने बताया खास महत्व
- तड़के सजा महाकाल दरबार: भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु, गूंजी जयकार
- उज्जैन के छात्र की कनाडा में मौत: CM मोहन यादव परिवार से मिले, अंतिम संस्कार तक हर मदद का भरोसा
72/84 श्री चन्द्रादित्येश्वर महादेव
72/84 श्री चन्द्रादित्येश्वर महादेव
सालों पहले एक दैत्य था शंबरासुर। उसने युद्ध में देवताओं को जीत लिया ओर स्वर्ग पर राज्य शुरू कर दिया। युद्ध में हारे देवता छिप गए, वही चंद्र ओर सूर्य भी भय के कारण भागने लगे। चंद्र के पुत्र अरूण चंद्र को राहु से युद्ध के दौरान पिता को दूसरे स्थान पर ले गया। सूर्य और चंद्र वहां से भगवान विष्णु के पास गए और स्तुति कर रक्षा की प्रार्थना की, भगवान विष्णु ने उनकी स्तुति से प्रसन्न होकर उनसे कहा कि तुम महाकाल वन में जाओ और महाकालेश्वर के उत्तर में स्थित शिवलिंग का पूजन करो, उनकी ज्वाला से शंबरासुर अपनी सेना के साथ जलकर भस्म हो जाएगा। सूर्य ओर चंद्र दोनों महाकाल वन में आए और शिवलिंग का पूजन किया। शिवलिंग से निकली ज्वाला से शंबरासुर सेना सहित नष्ट हो गया और स्वर्ग पर फिर देवता आसीन हो गए। तभी आकाशवाणी हुई कि चंद्र ओर सूर्य के साहस ओर यहा स्तुति करने के कारण शिवलिंग चंद्रादित्येश्वर के नाम से विख्यात होगा। मान्यता है कि जो भी मनुष्य शिवलिंग के दर्शन कर पूजन करता है उसके माता-पिता के कुल में सभी पवित्र हो जाते है ओर चंद्र व सूर्य लोक में निवास करते है।