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सुसाइड पॉइंट बना नृसिंह घाट ब्रिज
उज्जैन। सिंहस्थ के पहले शासन द्वारा शहर में 9 नवीन पुलों का निर्माण कराया गया था जिसमें नृसिंह घाट का नवीन ब्रिज भी शामिल था। इस ब्रिज के बनने से पहले लोग शिप्रा नदी के बड़े पुल से कूदकर आत्महत्या कर लिया करते थे, लेकिन नृसिंह घाट ब्रिज बनने के बाद यहां अब तक एक दर्जन से अधिक लोग नदी में कूदकर आत्महत्या कर चुके हैं। कल भी इंदौर की युवती ने नृसिंह घाट ब्रिज से कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया लेकिन लोगों ने उसे नदी में डूबते देखा और पुलिस को सूचना दी। गोताखोर की मदद से उसे नदी से जीवित निकाल लिया गया।
इंदौर के पंचम की फैल में रहने वाली 20 वर्षीय नेहा पिता रामअवतार अकोदिया अकेली बस में बैठकर उज्जैन आई थी। यहां उसने आत्महत्या के लिये दुकान से 30 रुपये में सब्जी काटने का चाकू खरीदा और नृसिंहघाट ब्रिज पहुंच गई। काफी देर तक अकेली बैठे रहने के बाद उसने हाथ की नस काटी और ब्रिज से नदी में छलांग लगा दी। यहां आसपास मौजूद लोगों ने उसे नदी में डूबते देखा तो रामघाट चौकी पर मौजूर आरक्षक मोहन परमार को सूचना दी।
आरक्षक अपने साथ सैनिक सुरेश शर्मा को लेकर यहां आये और सुरेश ने नदी के गहरे पानी में गोता लगाकर नेहा को पानी से बाहर निकाला। पूछताछ के बाद उसने अपना नाम, पता व परिजनों के मोबाईल नम्बर पुलिस को बताये जिसके आधार पर परिजनों को सूचना दी गई। इस दौरान उज्जैन में रहने वाले उसके रिश्तेदार भी नृसिंह घाट पहुंच गये। मोहन परमार ने बताया कि सूचना मिलने के बाद युवती को बचाने के लिये गोताखोर सैनिक सुरेश शर्मा को लेकर नृसिंह घाट ब्रिज पहुंचे तो युवती गहरे पानी में डूबती नजर आई जिस पर सुरेश शर्मा ने तुरंत नदी में कूदकर युवती की जान बचाई।
पहले भी लोग कर चुके हैं आत्महत्या
नृसिंह घाट ब्रिज बनने से लेकर अब तक ब्रिज से नदी में कूदकर एक दर्जन से अधिक लोग आत्महत्या कर चुके हैं जिनमें से कुछ माह पूर्व महाराष्ट्र के वृद्ध दंपत्ति ने नदी में कूदकर आत्महत्या की थी। इसके अलावा उज्जैन के युवक ने तड़के नदी में कूदकर आत्महत्या की और करीब 4 दिन पहले भोपाल के युवक ने इसी ब्रिज से कूदकर आत्महत्या कर ली। सामान्य तौर पर इस ब्रिज से लोगों का आवागमन कम ही होता है। संभवत: इसी कारण लोग सुनसान ब्रिज से नदी में कूदकर आत्महत्या करते हैं।
पुलिस और गोताखोरों की परेशानी
महाकाल थाना द्वारा रामघाट क्षेत्र में निगरानी रखने के लिये 24 घंटे एक आरक्षक की ड्यूटी लगाई जाती है साथ ही राणोजी की छत्री में चौकी भी स्थापित की गई है। इसके अलावा यहां पर होमगार्ड सैनिक व तैराक दल के सदस्य भी अधिकांश समय मौजूद रहते हैं। जैसे ही उक्त लोगों को किसी के डूबने की सूचना मिलती है तो वह भूखी माता से लेकर चक्रतीर्थ के आगे तक तुरंत पहुंचते हैं, लेकिन आये दिन लोगों के ब्रिज से कूदकर आत्महत्या करने के मामले में इनका कहना है कि आये दिन लोगों के ब्रिज से कूदने पर खासी मशक्कत करना पड़ रही है, अब तो यह ब्रिज सुसाइड पाइंट ही बन चुका है।