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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आज: इन्हें नहीं पता क्या है महिला दिवस टिफिन उठाया, चल दीं मजदूरी पर
उज्जैन। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को शासकीय व स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा व्यापक पैमाने पर मनाया जा रहा है लेकिन देश की कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो अपने परिवार के लिये न सिर्फ घरेलू काम करती हैं बल्कि पति के साथ मजदूरी कर आर्थिक जिम्मेदारी भी उठाती हैं। ऐसी निरक्षर महिलाओं को देश की आजादी के 70 वर्ष गुजर जाने के बाद भी यह नहीं पता कि महिला दिवस क्या होता है…।
सुबह करीब 8.10 पर उषाबाई, धापूबाई और कलाबाई सभी निवासी रतलाम अपने पति और बच्चों के साथ टॉवर से चामुंडा माता की ओर हाथों में टिफिन लिये पैदल जा रही थीं। उत्सुकतावश उनसे पूछा गया कि आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। इस दिन सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा महिलाओं का सम्मान किया जाता है, कई कार्यक्रम होते हैं। नौकरी अथवा अन्य कामों में लगी महिलाएं अवकाश लेती हैं लेकिन आप मजदूरी पर जा रही हो…
इस पर उषाबाई ने रुकते ही सिर पर घूंघट डाल लिया। धापूबाई से तीन बार पूछा कि आज क्या है, कलाबाई भी अपने पति के पीछे जाकर खड़ी हो गई। काफी पूछने पर धापूबाई ने हिचकते हुए बताया हम पढ़े-लिखे नहीं हैं, रोजी रोटी के लिये पति के साथ मजदूरी करते हैं। महिला दिवस क्या होता है यह तो नहीं पता, लेकिन आज हम सभी को एक साथ मजदूरी मिल गई और चामुंडा माता चौराहे से वाहन में बैठकर वहीं जाना है।
फिर कलाबाई ने कहा रहने के लिये घर नहीं, सोने को बिस्तर नहीं, बच्चों की पढ़ाई का प्रबंध भी नहीं होता। सुबह 4 बजे नींद से जागकर खाना बनाते हैं। 8 बजे तक खाने के बाद टिफिन में खाना रखकर मजदूरी की तलाश में निकलना पड़ता है, महिला दिवस से रोजी रोटी तो नहीं मिलती।