- उज्जैन में दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल: दूल्हे ने लौटाए 50 लाख के कैश और सोना, सिर्फ अंगूठी ली
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर खुले चांदी द्वार, बाबा का हुआ पंचामृत अभिषेक
- सिंहस्थ के लिए पुलिस को तैयार कर रहा प्रशासन: उज्जैन में पुलिस अफसरों की 21 दिन की खास ट्रेनिंग शुरू, 41 विषयों पर रहेगा फोकस; 117 अधिकारी बनेंगे “मास्टर ट्रेनर”
- उज्जैन में भस्म आरती में शामिल हुए बिहार के पूर्व डिप्टी CM विजय सिन्हा: नंदी हॉल में बैठकर किए दर्शन, महाकाल से मांगा आशीर्वाद
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: त्रिपुण्ड, त्रिशूल और डमरू से सजे बाबा, गूंजी ‘जय श्री महाकाल’
महाकाल मंदिर में बिना अनुमति गर्भगृह में प्रवेश: भाजपा विधायक गोलू शुक्ला और बेटे पर गंभीर आरोप, प्रशासन ने बैठाई जांच समिति!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
श्रावण सोमवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर में उस वक्त विवाद खड़ा हो गया जब इंदौर-3 से भाजपा विधायक गोलू शुक्ला और उनके बेटे रुद्राक्ष पर बिना अनुमति मंदिर के गर्भगृह में जबरन घुसने और कर्मचारियों से दुर्व्यवहार के आरोप लगे। घटना सोमवार तड़के करीब ढाई बजे की है, जब भस्म आरती के पट खुलते ही विधायक अपने समर्थकों के साथ मंदिर पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरती के दौरान जल अर्पण करते समय विधायक सीधे गर्भगृह में प्रवेश कर गए। वहीं, उनके बेटे रुद्राक्ष को जब मंदिर कर्मचारियों ने रोका, तो उसने धमकी दी और जबरन अंदर घुस गया।
शुरुआत में मंदिर प्रशासन ने विधायक को अनुमति प्राप्त व्यक्ति बताया, लेकिन मंगलवार को उप प्रशासक एसएन सोनी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को उस दिन गर्भगृह में प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि विधायक और उनके बेटे ने मंदिर कर्मचारियों से दुर्व्यवहार किया और नियमों की अनदेखी की।
मामले ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर तूल पकड़ लिया, जिसके बाद उज्जैन कलेक्टर ने इस घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है। यह समिति सात दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर अक्टूबर 2022 से ही प्रतिबंध है, जब महाकाल लोक परियोजना के तहत मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ। अब सिर्फ विशेष अनुमति प्राप्त व्यक्तियों को ही गर्भगृह में प्रवेश की इजाजत दी जाती है।
विधायक गोलू शुक्ला ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उनके पास कलेक्टर और मंदिर प्रशासन की अनुमति थी। उन्होंने कहा कि पांच व्यक्तियों के नाम की स्वीकृति उन्हें दी गई थी, और बेटे को रोके जाने पर मामूली बहस हुई थी।
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब रुद्राक्ष शुक्ला पर मंदिर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा हो। चार साल पहले भी वह गर्भगृह में प्रवेश कर फोटो खिंचवा चुका है, जिसे उसने सोशल मीडिया पर साझा किया था। तब भी मामला सुर्खियों में आया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।