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ध्वज पूजन से लेकर ध्वजारोहण तक… महाकाल मंदिर में दशहरे की परंपरा ने भक्तों को किया भावविभोर; विजयदशमी पर बाबा महाकाल के शिखर पर चढ़ा नया ध्वज!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार को विजयदशमी पर्व की पावन परंपरा निभाई गई। इस अवसर पर मंदिर के मुख्य शिखर पर ध्वज परिवर्तन किया गया। हर साल दशहरे पर होने वाली यह परंपरा महाकाल भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इसे विजय और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
सुबह आरती के पश्चात मंदिर परिसर स्थित श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा में ध्वज पूजन विधिवत सम्पन्न हुआ। अखाड़ा के महंत विनीत गिरी महाराज ने मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजन कराया। इसके बाद भगवान महाकाल के गगनभेदी जयकारों के बीच तहसील कार्यालय की ओर से नया ध्वज मंदिर के मुख्य शिखर पर आरोहित किया गया।
दोपहर से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। श्रद्धालुओं ने ध्वज पूजन और आरोहण के इस ऐतिहासिक क्षण को अपनी आंखों में संजो लिया। यह परंपरा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि उज्जैन की आस्था और संस्कृति का भी प्रतीक मानी जाती है।
विजयदशमी पर्व के उपलक्ष्य में शाम चार बजे सभा मंडप में विशेष पूजन के बाद बाबा महाकाल की सवारी निकाली जाएगी। यह भव्य सवारी शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई फ्रीगंज स्थित दशहरा मैदान तक पहुंचेगी, जहां शमी पूजन संपन्न होगा।
इसी दिन संध्या पूजन के बाद भगवान महाकाल को नए वस्त्रों से अलंकृत किया जाएगा। भक्तों को इस दौरान बाबा के विशेष होल्कर मुखारविंद स्वरूप में दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
महाकालेश्वर मंदिर की यह परंपरा हर साल भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव कराती है, जिसमें आस्था, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।