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उज्जैन में जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण पर्व की भव्य तैयारियां, नारायणाधाम से लेकर सांदीपनी आश्रम तक गूंजेंगे भक्ति स्वर; 14 से 18 अगस्त तक रासलीला, लोकनृत्य और भजनों से सजेगा शहर!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में इस बार जन्माष्टमी पर्व भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों में डूबा दिखाई देगा। नारायणाधाम मंदिर प्रांगण में हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रीकृष्ण-सुदामा की पावन मित्रता के साक्षी स्थान पर जन्माष्टमी का पर्व बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाएगा। मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सुसज्जित किया गया है, जो श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत और मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करेगा।
14 अगस्त को भगवान कृष्ण की शाही सवारी निकलेगी, जिसे पुलिस बैंड द्वारा सलामी दी जाएगी। वहीं 10 से 16 अगस्त तक भागवत कथा का वाचन किया जा रहा है। 14 से 18 अगस्त तक मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग के सहयोग से देशभर के प्रतिष्ठित कलाकार और सांस्कृतिक संस्थाएं मंच सजाएंगी। इनमें कृष्ण नृत्य नाटिका, भक्ति गायन, गणगौर लोकनृत्य और पांच दिवसीय रासलीला जैसे रंगारंग कार्यक्रम शामिल होंगे।
राज्य सरकार इस बार जन्माष्टमी के अवसर पर 14 अगस्त को बलराम जयंती और हलधर महोत्सव तथा 16 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर ‘श्रीकृष्ण पर्व’ और ‘लीला पुरुषोत्तम प्राकट्योत्सव’ का आयोजन कर रही है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास बताया है।
उज्जैन में सांदीपनी आश्रम में 16 से 18 अगस्त तक विशेष आयोजन होंगे, जहां श्रीकृष्ण लीला, बांसुरी वादन, भक्ति गायन, बरेदी लोकनृत्य और रासलीला की प्रस्तुतियां होंगी। यहां विशाला सांस्कृतिक संस्थान के कलाकारों के साथ इंदौर, उज्जैन और बैतूल से आए दल अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
नारायणाधाम मंदिर प्रांगण में 14 से 18 अगस्त तक कृष्ण नृत्य नाटिका और भक्ति गायन की श्रृंखला चलेगी। इसमें भोपाल, दिल्ली, खंडवा, आगर-मालवा, मथुरा, मुंबई और उज्जैन से आए कलाकार अलग-अलग विधाओं में प्रस्तुति देंगे। गणगौर लोकनृत्य, कृष्ण नृत्य नाटिका, भक्ति गायन और रासलीला जैसे कार्यक्रम हर दिन वातावरण को कृष्णमय बनाएंगे।
महिदपुर स्थित राधाकृष्ण मंदिर में 14 से 16 अगस्त तक मयूर नृत्य, फूलों की होली, रासलीला और भक्ति गायन का आयोजन होगा। वहीं गोपाल मंदिर में 16 अगस्त को भक्ति गायन और मटकी लोकनृत्य का आनंद श्रद्धालु ले सकेंगे।
उज्जैन जिले के अलावा जानापाव, अमझेरा और पन्ना जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर भी कृष्ण पर्व का आयोजन होगा। जानापाव में कृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान करने की ऐतिहासिक कथा से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, जबकि अमझेरा में कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग से संबंधित नृत्य नाटिका और भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी।
पूरे कार्यक्रम के दौरान कृष्ण लीला, भक्ति संगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक कलाओं के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन, अवदान और सांस्कृतिक महत्व को प्रस्तुत किया जाएगा। प्रवेश सभी के लिए निःशुल्क रहेगा, जिससे हर वर्ग के लोग इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्व का हिस्सा बन सकेंगे।