महाकाल मंदिर में सबसे पहले गूंजेगा होली का उत्सव: 2 मार्च को गुलाल अर्पण और होलिका दहन, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण बदलेगी पूजा व्यवस्था

उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:

उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर इस वर्ष भी होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत का साक्षी बनेगा। देश में रंगों का पर्व मनाए जाने से पहले 2 मार्च की शाम महाकाल मंदिर में संध्या आरती के दौरान भगवान महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसी क्रम में आरती के बाद मंदिर परिसर में होलिका दहन आयोजित होगा।

मंदिर परिसर में कंडों से सजाई गई होली का विधि-विधान से पूजन पुजारी पंडित घनश्याम शर्मा और अन्य पंडे-पुजारियों द्वारा किया जाएगा। पूजन और परिक्रमा के बाद होलिका दहन होगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। परंपरा के अनुसार, होलिका दहन के पश्चात कई भक्त मंदिर परिसर में ही एक-दूसरे को रंग लगाकर उत्सव की शुरुआत करते हैं।

धुलेंडी पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

इस बार होली के अगले दिन 3 मार्च, मंगलवार (फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा) को चंद्र ग्रहण रहेगा। ग्रहण का समय शाम 6:32 से 6:46 तक निर्धारित है, जो कुल 14 मिनट का होगा। हालांकि इसका वेद काल सूर्योदय से ही प्रभावी रहेगा।

चंद्र ग्रहण को ध्यान में रखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर की पूजा पद्धति में आंशिक बदलाव रहेगा। धुलेंडी के दिन भस्म आरती से लेकर ग्रहण समाप्ति तक मंदिर के पट बंद नहीं किए जाएंगे और श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति रहेगी।

वेद काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को नियमित भोग के स्थान पर केवल शक्कर अर्पित की जाएगी। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा, तत्पश्चात भगवान का स्नान, पूजन और भोग अर्पण के बाद संध्या आरती संपन्न होगी।

3 मार्च को प्रातः 4 बजे होने वाली भस्म आरती में पुजारी-पुरोहित सर्वप्रथम बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित करेंगे। यह धुलेंडी पर्व की पारंपरिक शुरुआत मानी जाती है।

4 मार्च से बदलेगा आरती का समय

चैत्र कृष्ण प्रतिपदा, जो 4 मार्च को है, से भगवान महाकाल की दिनचर्या में मौसमानुसार परिवर्तन लागू होगा। इसी दिन से ग्रीष्मकालीन व्यवस्था प्रभावी मानी जाती है। परंपरा के अनुसार, इस तिथि से भगवान को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा और यह क्रम शरद पूर्णिमा तक जारी रहेगा।

महाकाल मंदिर में वर्ष में दो बार आरती समय में बदलाव किया जाता है— कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से शीतकालीन समय और चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से ग्रीष्मकालीन समय लागू होता है। 4 मार्च से प्रतिदिन होने वाली पांच में से तीन आरतियों का समय परिवर्तित रहेगा।

4 मार्च से शरद पूर्णिमा तक आरती का समय इस प्रकार रहेगा:

  • प्रथम भस्म आरती: प्रातः 04:00 से 06:00 बजे तक

  • द्वितीय दद्योदक आरती: प्रातः 07:00 से 07:45 बजे तक

  • तृतीय भोग आरती: प्रातः 10:00 से 10:45 बजे तक

  • चतुर्थ संध्या पूजन: सायं 05:00 से 05:45 बजे तक

  • पंचम संध्या आरती: सायं 07:00 से 07:45 बजे तक

  • शयन आरती: रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक

एक ओर 2 मार्च की शाम मंदिर परिसर में रंग और परंपरा का संगम दिखाई देगा, वहीं 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण निर्धारित विधि-विधान के अनुसार पूजा पद्धति संचालित होगी। दर्शन व्यवस्था जारी रहेगी, जबकि ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण और भोग अर्पण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इस प्रकार महाकालेश्वर मंदिर में होली और चंद्र ग्रहण— दोनों अवसरों पर प्राचीन परंपराओं के अनुरूप आयोजन सुनिश्चित किया गया है।

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