- महाकाल के दरबार में सेलिब्रिटीज की मौजूदगी: रवि किशन और जानकी बोड़ीवाला ने किए दर्शन, मांगी देश-प्रदेश की खुशहाली
- भस्म आरती में महाकाल का दिव्य स्वरूप: भांग-चंदन से हुआ श्रृंगार, श्रद्धालुओं की भीड़
- महाकाल मंदिर पहुंचे अनुपम खेर, शुभांगी दत्त और सिंगर अमित भल्ला: अलग-अलग आरतियों में हुए शामिल, नंदी हॉल में किया पूजन; मांगी मनोकामना
- सिंहस्थ 2028 से पहले कार्रवाई तेज: उज्जैन में 4 अवैध निर्माण ढहाए, 3 को मिला 2 दिन का समय
- महाकाल में भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप में दिए दर्शन, गूंजा जयकारा
उज्जैन में निगम की ही पार्किंग बनी ‘अतिक्रमण का अड्डा’ — ठेकेदार ने खड़ी कर दी दुकानें और गैरेज, वसूला तय दर से ज्यादा पैसा
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन शहर में जहां नगर निगम रोजाना अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाता है, वहीं खुद निगम के ठेके पर चल रही पार्किंग में ही नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। देवासगेट बस स्टैंड के पार्किंग क्षेत्र में न सिर्फ टीनशेड डालकर दुकानें बना दी गई हैं, बल्कि अब वहां एक गैरेज का भी संचालन खुलेआम चल रहा है। यही नहीं, वाहन चालकों से तय दर से ज्यादा शुल्क वसूलने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।
ठेके पर मिली पार्किंग में हुआ अस्थाई निर्माण
देवासगेट बस स्टैंड पर नगर निगम ने कुछ महीने पहले करीब 7.50 लाख रुपए वार्षिक ठेका राशि पर वाहन पार्किंग का ठेका दिया था। लेकिन ठेकेदार ने शर्तों का उल्लंघन करते हुए यहां अस्थाई रूप से चार दुकानें बनवा लीं। नियमों के अनुसार, ठेकेदार को केवल पार्किंग संचालन की अनुमति थी, किसी प्रकार के स्थायी या अस्थायी निर्माण की नहीं। इसके अलावा, स्टैंड परिसर में एक पेड़ को बिना अनुमति काट दिया गया, जो वन विभाग के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
तय दर से ज्यादा वसूली, चालक बोले—”10 नहीं तो पार्किंग नहीं”
नगर निगम की गाइडलाइन के मुताबिक, दोपहिया वाहन के लिए पार्किंग शुल्क 10 रुपए प्रतिदिन तय है। लेकिन मौके पर ठेकेदार के कर्मचारी 15 रुपए तक वसूल रहे हैं। जब वाहन चालक इसका विरोध करते हैं, तो उनसे बदतमीजी की जाती है और झगड़े की नौबत आ जाती है। यही हाल नानाखेड़ा बस स्टैंड का भी है, जहां वाहन चालकों से 10 की जगह 20 रुपए तक लिए जा रहे हैं।
शहर के बीचोबीच नियमों की अनदेखी
देवासगेट बस स्टैंड उज्जैन के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है, जहां से दिनभर कई अफसर और जनप्रतिनिधि गुजरते हैं। बावजूद इसके, निगम की टीम ने अब तक यहां किसी भी तरह की जांच या कार्रवाई नहीं की है। सवाल यह उठता है कि क्या नगर निगम को अपने ही ठेकेदार की इन मनमानी पर ‘चुप्पी साधने’ की छूट है?
नियम कहते हैं – तीन गलती पर ठेका रद्द
नगर निगम की शर्तों के अनुसार, अगर ठेकेदार द्वारा तय शुल्क से अधिक वसूली की जाती है, तो पहली बार 5 हजार, दूसरी बार 10 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया जा सकता है। अगर तीसरी बार भी नियम तोड़े जाते हैं, तो निगम को ठेका निरस्त कर राशि राजसात करने और पार्किंग का कब्जा वापस लेने का अधिकार है।
निगम बोले – “टीनशेड और दुकानों को हटाया जाएगा”
इस पूरे मामले पर सहायक आयुक्त प्रदीप सेन ने कहा कि देवासगेट पार्किंग स्थल पर ठेकेदार द्वारा टीनशेड डालकर किए गए अस्थाई निर्माण को हटाया जाएगा। साथ ही, तय शुल्क से अधिक वसूली की भी जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सवाल अब यह है कि जो निगम दूसरों के अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाता है, क्या वह अपने ठेकेदारों के अतिक्रमण पर भी उतनी ही सख्ती दिखाएगा?