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विक्रम विश्वविद्यालय में गोपनीयता पर सवाल: छात्रों से करवाई गई आंसर शीट कोडिंग, कुलपति और छात्र नेता में तीखी बहस; वायरल वीडियो से हड़कंप!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के प्रतिष्ठित विक्रम विश्वविद्यालय की साख उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब गोपनीय विभाग में छात्रों द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं पर कोडिंग करते हुए एक वीडियो सामने आया। यह वीडियो एनएसयूआई के छात्र नेता बबलू खींची द्वारा रिकॉर्ड किया गया, जिसमें गोपनीय शाखा में दो छात्रों को कॉपियों के बंडलों पर कोड डालते देखा गया।
यह मामला और बड़ा तब बन गया जब कुलपति अर्पण भारद्वाज स्वयं मौके पर पहुंच गए, और छात्र नेता से तीखी नोकझोंक हो गई। वीडियो में कुलपति को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि “हमने छात्रों को विजिट के तौर पर बुलाया था“, लेकिन छात्र नेता का सवाल था — अगर यह सिर्फ विजिट थी तो छात्र गोपनीय दस्तावेजों पर कोडिंग क्यों कर रहे थे?
एनएसयूआई नेता ने आरोप लगाया कि गोपनीय विभाग विश्वविद्यालय की सबसे संवेदनशील इकाई होती है, जहाँ परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री जैसे उत्तर पुस्तिकाएं और मूल्यांकन दस्तावेज रखे जाते हैं। वहाँ बिना अनुमोदन किसी बाहरी व्यक्ति, विशेषकर छात्रों का जाना अत्यंत गंभीर चूक मानी जाती है।
क्या होती है कोडिंग और क्यों है यह संवेदनशील?
विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, परीक्षा संपन्न होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को केंद्रवार बंडल में तैयार किया जाता है और उन पर कोडिंग की जाती है। यह कोडिंग यह सुनिश्चित करती है कि कौन-सी कॉपियां किस मूल्यांकन केंद्र पर जाएंगी और किस परीक्षक को जांचनी हैं। यह कोड सिर्फ गोपनीय विभाग को ज्ञात होता है। अगर यह प्रक्रिया पारदर्शी न हो और बाहरी व्यक्तियों से करवाई जाए, तो परीक्षा परिणामों की गोपनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
घटना के वायरल होने के बाद कुलपति अर्पण भारद्वाज ने सफाई देते हुए कहा कि छात्रों को केवल विजिट पर बुलाया गया था, ताकि उन्हें विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली की जानकारी दी जा सके। उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण बच्चों से बंडल बनाने का काम करवाया जा रहा था, लेकिन वे जिस विषय की कॉपियां थीं, उससे संबंधित नहीं थे।
जब छात्र नेता ने यह पूरा मामला कुलसचिव को बताया तो उन्होंने घटना की जानकारी से इनकार किया। यह और अधिक गंभीर चिंता का विषय बन गया, क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि या तो गोपनीय विभाग में बिना उच्च प्रशासनिक अनुमति के छात्रों को घुसने दिया गया, या फिर प्रशासनिक संवाद की कमी है।
इस घटना के बाद एनएसयूआई समेत अन्य छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। वे मांग कर रहे हैं कि गोपनीय विभाग में छात्रों की एंट्री पर जांच हो, और यह स्पष्ट किया जाए कि किसकी अनुमति से छात्रों से कोडिंग जैसा संवेदनशील कार्य करवाया गया।