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शहर में दंगा या ड्रिल? टावर चौक पर अचानक भारी पुलिस बल देखकर लोग रह गए दंग, फिर समझ आया माजरा: पुलिस ने दंगा जैसी स्थिति में किया लाठीचार्ज और गोलीबारी का अभ्यास!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन शहर का टावर चौक शुक्रवार सुबह अचानक पुलिस बल की भारी मौजूदगी से जाम हो गया। चौराहे पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, वाहन और एंबुलेंस देखकर स्थानीय लोग घबरा गए। कुछ देर तक लोगों को लगा मानो शहर में बड़ा हंगामा या दंगा भड़क गया हो। लेकिन थोड़ी ही देर बाद सच्चाई सामने आई कि यह सब पुलिस की मॉक ड्रिल का हिस्सा था, जिसमें दंगे जैसी स्थिति को दर्शाते हुए जवानों को दंगा नियंत्रण की रिहर्सल कराई जा रही थी।
मॉक ड्रिल का पूरा सीन – पथराव से लेकर गोलीबारी तक
ड्रिल के दौरान पुलिसकर्मियों को दो ग्रुप में बांटा गया। एक पक्ष ‘दंगाई’ बना और उन्होंने अचानक पत्थरबाजी शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने पहले समझाइश और लाठीचार्ज किया। इसके बाद गैस पार्टी ने गैस फायर किए और हालात बेकाबू दिखाने पर रायफल पार्टी को बुलाया गया। आख़िर में मजिस्ट्रेट की अनुमति से गोलीबारी की कार्यवाही की गई।
इस नाटकीय दृश्य में एक ‘दंगाई’ की मौत दिखाई गई और एक घायल को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया। यह सब क्रमबद्ध तरीके से इस तरह किया गया कि पूरा माहौल बिल्कुल असली दंगे जैसा प्रतीत हो।
लोग हुए दंग, फिर समझ आया माजरा
शहरवासी जब अचानक पुलिस की इस भारी तैनाती और गोलियों की आवाज़ सुनकर टावर चौक पर पहुंचे तो कई लोग घबरा गए। लेकिन अधिकारियों ने बताया कि यह सब दंगा-नियंत्रण की तैयारी का हिस्सा है। इस मॉक ड्रिल का मकसद यह देखना था कि वास्तविक स्थिति में पुलिस और प्रशासन कितनी तत्परता से कार्रवाई कर सकते हैं।
वरिष्ठ अफसरों की मौजूदगी
इस मॉक ड्रिल के दौरान एएसपी गुरुप्रसाद पाराशर, सीएसपी दीपिका शिंदे, राहुल देशमुख, आरआई रणजीत सिंह समेत शहर के सभी थाना प्रभारी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। अधिकारियों ने जवानों को विस्तार से बताया कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में किस अफसर की क्या भूमिका होगी और बल प्रयोग की प्रक्रिया किस क्रम में लागू करनी है।
क्यों जरूरी पड़ी यह ड्रिल?
एएसपी गुरुप्रसाद पाराशर ने बताया कि कई बार असामाजिक तत्व अपनी मांगों को लेकर शहर की कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसे हालात में पुलिस को तय नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी पड़ती है। यही कारण है कि समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाती है, ताकि जवान वास्तविक स्थिति में बेहतर और त्वरित प्रतिक्रिया दे सकें।
टावर चौक पर हुई इस मॉक ड्रिल ने लोगों को भले ही कुछ देर के लिए डरा दिया हो, लेकिन इसने यह भी साफ कर दिया कि शहर की पुलिस किसी भी आपातकालीन हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।