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महाकाल मंदिर परिसर के पास खुदाई में मिला शिवलिंग: निर्माण कार्य रोका गया, दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर के नजदीक शुक्रवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र में आस्था और कौतूहल का वातावरण बना दिया। मंदिर के सामने गेट नंबर-4 के पास चल रहे निर्माण कार्य के दौरान खुदाई में एक शिवलिंग मिलने की सूचना मिलते ही मौके पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग गया।
यह निर्माण कार्य श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए टनल और वेटिंग हॉल के रूप में विकसित किया जा रहा है। शुक्रवार तड़के करीब 5 बजे जब पोकलेन मशीन से खुदाई चल रही थी, तभी मशीन ऑपरेटर की नजर मिट्टी के बीच एक शिवलिंग जैसी आकृति पर पड़ी। स्थिति स्पष्ट होते ही तत्काल काम रोक दिया गया और साइट इंजीनियर तथा मंदिर प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई।
पूजन के बाद सुरक्षित रखा गया शिवलिंग
सूचना मिलते ही मंदिर के पुजारी मौके पर पहुंचे और विधि-विधान के साथ शिवलिंग का पूजन-अर्चन किया। प्रारंभिक स्तर पर इसे उसी स्थान पर सुरक्षित रखा गया है, जहां यह मिला था। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर खुदाई का कार्य फिलहाल स्थगित कर दिया है, ताकि स्थल की आगे की जांच सावधानीपूर्वक की जा सके।
खबर फैलते ही जुटी भीड़, शुरू हुए दर्शन
घटना की जानकारी जैसे ही आसपास के क्षेत्रों में फैली, बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर पहुंचने लगे। देखते ही देखते वहां दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं में इस अप्रत्याशित खोज को लेकर विशेष उत्साह और श्रद्धा का भाव देखा गया।
अन्य प्राचीन अवशेष मिलने की संभावना
साइट इंजीनियर सतीश राजपूत के अनुसार खुदाई के दौरान केवल शिवलिंग ही नहीं, बल्कि अन्य प्राचीन संरचनाओं या मूर्तियों के अवशेष मिलने के संकेत भी मिले हैं। उन्होंने संभावना जताई कि नंदी की प्रतिमा जैसे अवशेष भी यहां मौजूद हो सकते हैं, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
पहले भी मिल चुके हैं प्राचीन अवशेष
यह पहली बार नहीं है जब महाकाल मंदिर क्षेत्र में खुदाई के दौरान ऐतिहासिक धरोहर सामने आई हो। इससे पहले मई 2020 में मंदिर विस्तार परियोजना के दौरान करीब 25 से 30 फीट नीचे खुदाई में एक प्राचीन मंदिर के अवशेष प्राप्त हुए थे। उस समय शिवलिंग, नंदी, गणेश, मां चामुंडा सहित कई प्रतिमाएं मिली थीं।
पुरातत्व विशेषज्ञों ने उन अवशेषों को लगभग एक हजार वर्ष पुराना बताते हुए परमारकालीन कालखंड से संबंधित माना था।
आस्था और इतिहास का संगम बना स्थल
ताजा घटनाक्रम के बाद यह क्षेत्र एक बार फिर धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व के केंद्र के रूप में चर्चा में आ गया है। जहां एक ओर श्रद्धालु इसे दिव्य संकेत के रूप में देख रहे हैं, वहीं प्रशासन और विशेषज्ञ आगे की जांच के माध्यम से इसके ऐतिहासिक पहलुओं को समझने की दिशा में काम कर रहे हैं।
फिलहाल, शिवलिंग मिलने के बाद निर्माण स्थल पर गतिविधियां सीमित कर दी गई हैं और पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।