- बाबा महाकाल की शरण में पहुंचीं अभिनेत्री तमन्ना भाटिया, भस्म आरती में हुईं शामिल
- उज्जैन में बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार: भांग, चंदन और त्रिपुंड से सजे राजाधिराज, भस्म आरती में उमड़ी आस्था
- उज्जैन में किसान कांग्रेस के प्रदर्शन पर बढ़ा तनाव, पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प; तीन लोगों को हिरासत में लिया गया
- महाकाल मंदिर में भोर की भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में हुए बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन
- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार: उज्जैन में घाटों पर उतरी प्रशासनिक टीम, भीड़ प्रबंधन पर सबसे ज्यादा जोर
आज से शुरू श्राद्ध पक्ष: मोक्षदायिनी शिप्रा में तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व, नगर निगम ने श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए की व्यवस्था
जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
श्राद्ध पक्ष, जिसे पितृ पक्ष भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व विशेष रूप से पितरों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। श्राद्ध पक्ष का आयोजन हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा से लेकर अमावस्या तक होता है। इस दौरान, परिवार के सदस्य अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
इस बार श्राद्ध पक्ष का आरंभ 18 सितंबर बुधवार से हुआ है। श्राद्ध पक्ष में देशभर से श्रद्धालु उज्जैन की मोक्षदायिनी शिप्रा के सिद्धवट, रामघाट के अलावा अंकपात चौराहे पर स्थित गयाकोठा में पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान के लिए पहुंचते हैं। बता दें, मोक्षदायिनी शिप्रा में तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व माना गया है। इस बार श्राद्ध पक्ष 18 सितंबर से 2 अक्टूबर तक रहेगा।
वहीं, श्राद्ध पक्ष के पहले दिन ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा तट पहुंचे और पितरों के निमित्त पूजन किया। ऐसे में निगम प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए टीन शेड आदि लगाए गए हैं, साथ ही शिप्रा नदी के रामघाट, सिद्धवट घाट में कीचड़ व गंदगी की सफाई कराई गई है।
वहीं, अंकपात मार्ग स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर श्राद्ध पक्ष में सामूहिक श्राद्ध तर्पण एवं पिंडदान की नि:शुल्क व्यवस्था की गई है। श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन सुबह 8 से 10 बजे तक तथा चौदस और अमावस्या को दो पारियों में सुबह 7:30 बजे और 9:30 बजे से तर्पण पिंडदान कराया जाएगा। सभी पूजन सामग्री यहां नि:शुल्क उपलब्ध रहेगी।
श्राद्ध में तिल, जौ, और अन्य अनाजों का उपयोग किया जाता है, जो पितरों को अर्पित किए जाते हैं। इस समय, पितरों को अन्न, जल और अन्य भोग अर्पित करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। श्राद्ध का आयोजन करने से परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। श्राद्ध पक्ष का पालन करने से हम अपने पूर्वजों की याद में उन्हें सम्मानित करते हैं।