- 40° के पार तापमान, फिर भी नहीं थमी आस्था: महाकाल में रोज 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालु; पहली बार महाकाल लोक में शुरू हुआ फोगिंग सिस्टम
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40° के पार तापमान, फिर भी नहीं थमी आस्था: महाकाल में रोज 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालु; पहली बार महाकाल लोक में शुरू हुआ फोगिंग सिस्टम
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। पिछले एक सप्ताह से शहर का तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि आम लोग जरूरी काम के अलावा घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
लेकिन इन सबके बीच एक तस्वीर बिल्कुल अलग है—महाकाल मंदिर में आस्था का सैलाब लगातार उमड़ रहा है। भीषण गर्मी के बावजूद रोजाना एक लाख से अधिक श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नई पहल—फोगिंग सिस्टम की शुरुआत
गर्मी से राहत देने के लिए इस बार मंदिर समिति ने एक नई व्यवस्था लागू की है। पहली बार महाकाल लोक क्षेत्र में फोगिंग सिस्टम लगाया गया है।
फिलहाल इसे परीक्षण के तौर पर मानसरोवर से त्रिनेत्र क्षेत्र तक स्थापित किया गया है। इस सिस्टम के जरिए हल्की पानी की फुहारें छोड़ी जा रही हैं, जिससे दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं को गर्मी से कुछ राहत मिल रही है।
करीब 900 मीटर पैदल चलना पड़ता है, इसलिए बढ़ाई गई सुविधाएं
महाकाल मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को त्रिवेणी से मानसरोवर तक लगभग 900 मीटर का रास्ता पैदल तय करना पड़ता है। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच यह सफर काफी कठिन हो जाता है।
इससे पहले मंदिर समिति की ओर से इस मार्ग पर मैट बिछाने, धूप से बचाव के लिए टेंट लगाने और पीने के पानी के लिए वाटर कूलर की व्यवस्था की जा चुकी थी।
अब इन्हीं इंतजामों के साथ फोगिंग सिस्टम जोड़ दिया गया है, जिससे पूरे रास्ते में ठंडक का अनुभव हो रहा है।
फुहारों से मिल रही राहत, श्रद्धालुओं में संतोष
नई व्यवस्था के तहत जैसे ही श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरते हैं, उन पर हल्की पानी की बौछार पड़ती है। इससे तपती गर्मी के बीच उन्हें तुरंत राहत महसूस हो रही है।
मंदिर आने वाले श्रद्धालु इस पहल को सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं और व्यवस्था से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
डेमो सफल रहा तो पूरे महाकाल लोक में होगा विस्तार
महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहले से टेंट, पेयजल और कार्पेट जैसी व्यवस्थाएं मौजूद थीं।
अब फोगिंग सिस्टम को परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी साबित होती है, तो आने वाले समय में इसे पूरे महाकाल लोक और मंदिर परिसर में विस्तार देने की योजना है।