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गांव ने 25 साल पुरानी परंपरा तोड़ी: चंबल नदी हादसे में तीन मासूमों की मौत के बाद अब नहीं होगी देवी प्रतिमा स्थापना, उज्जैन का पीरझालर गांव सदमे में; मुख्यमंत्री बोले — ‘यह दुख मेरा भी है’
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र के पीरझालर गांव में हुई चंबल नदी दुर्घटना ने पूरे इलाके को शोक में डूबो दिया है। देवी प्रतिमा विसर्जन के दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी में गिरने से तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई, जबकि दो बच्चे अब भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। गांव में प्रवेश करते ही हर घर से रोने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। मातम का ऐसा माहौल है कि लोग अब मूर्ति स्थापना की परंपरा तक तोड़ने का निर्णय ले चुके हैं।
कैसे हुआ हादसा
गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे गांव के कुछ लोग देवी प्रतिमा विसर्जन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर चंबल नदी के किनारे पहुंचे थे। विसर्जन पूरा होने के बाद ट्रैक्टर वहीं खड़ा था। तभी किसी बच्चे ने खेल-खेल में ट्रैक्टर की चाबी घुमा दी। ट्रैक्टर अचानक स्टार्ट हुआ और ट्रॉली समेत नदी में जा गिरा। इस दर्दनाक हादसे में 12 बच्चे पानी में बह गए, जिनमें से 11 को तुरंत बाहर निकाल लिया गया। जबकि एक बच्चे, शुभम चौहान (16) का शव शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे मिला।
तीन मासूमों की गई जान
इस हादसे में जिन बच्चों की जान गई, उनमें
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पृथ्वीराज पिता दिनेश चौहान (16)
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वंश पिता अर्जुन चौहान (8)
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शुभम चौहान (16)
शामिल हैं।
वहीं, अंश और आदित्य नाम के दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इंदौर के चोइथराम अस्पताल में इलाज चल रहा है।
तीनों बच्चों के घर एक-दूसरे से करीब 100 मीटर की दूरी पर हैं। हर घर में मातम पसरा है। शुभम के घर के सामने वंश का मकान है और थोड़ी दूर पर पृथ्वीराज का घर। वंश के पिता अर्जुन चौहान अभी भी इंदौर में हैं और अपने घायल बेटे अंश का इलाज करवा रहे हैं। परिवार ने अभी तक उन्हें वंश की मौत की खबर नहीं दी है। उन्हें बस इतना बताया गया है कि बेटा उज्जैन के अस्पताल में है और जल्द ठीक हो जाएगा।
दोनों भाई बैठे थे ट्रैक्टर के आगे
ग्रामीण जीवन सिंह परमार ने बताया कि वंश और अंश दोनों भाई ट्रैक्टर के आगे वाले हिस्से में बैठे थे। जैसे ही ट्रैक्टर स्टार्ट हुआ, वह आगे बढ़ा और नदी में जा गिरा। वंश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अंश को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया।
पृथ्वीराज की मौत से टूटा परिवार
16 वर्षीय पृथ्वीराज चौहान घर का इकलौता बेटा था। हर साल 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाकर स्कूल में टॉप करता था। गांव के लोग बताते हैं कि वह हर धार्मिक कार्यक्रम में सबसे आगे रहता था। जिस माता की मूर्ति के विसर्जन में वह गया था, उसी आयोजन में वह हर साल बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। लेकिन इस बार लौटकर नहीं आया।
25 साल पुरानी परंपरा टूटी
तीन बच्चों की मौत से गांववाले पूरी तरह टूट गए हैं। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि अब गांव में उसी स्थान पर माता की प्रतिमा स्थापना नहीं की जाएगी। यह परंपरा पिछले 25 वर्षों से लगातार चल रही थी, लेकिन इस बार के हादसे ने सबकुछ बदल दिया।
सीएम मोहन यादव पहुंचे गांव, संवेदना व्यक्त की
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार दोपहर सीधे पीरझालर गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मिले। उन्होंने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर यह दौरा किया। मुख्यमंत्री ने कहा — “आप सब मेरे परिवार का हिस्सा हैं। इस हृदय विदारक घटना के बाद से मुझे नींद नहीं आई है। राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में आपके साथ खड़ी है।”
उन्होंने घोषणा की कि
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प्रत्येक मृतक बच्चे के परिजन को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
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गंभीर रूप से घायल बच्चों को 1-1 लाख रुपए की सहायता मिलेगी और इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
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साथ ही, रेस्क्यू में मदद करने वालों को गणतंत्र दिवस पर सम्मानित किया जाएगा।
ब्रिज की रेलिंग तुरंत दुरुस्त कराई गई
हादसे में ट्रैक्टर के नदी में गिरने से ब्रिज की रेलिंग टूट गई थी। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए 24 घंटे के अंदर रेलिंग की मरम्मत कराई। कलेक्टर रौशन सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा भी लिया।