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सदियों पुरानी परंपरा निभा रहा उज्जैन का श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर: जन्माष्टमी के बाद चार दिन तक नहीं होगी शयन आरती, बछ बारस पर होगा विशेष आयोजन; मंदिर द्वार पर फूटेगी माखन की मटकी!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट के अंतर्गत आने वाले श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में भव्य उत्सव मनाया गया। आधी रात भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव आरती और विशेष पूजन-अर्चन के साथ संपन्न हुआ। जन्म आरती के साथ ही मंदिर की परंपरागत व्यवस्था में बदलाव भी शुरू हो गया है। परंपरा के अनुसार, जन्माष्टमी से लेकर एकादशी तक भगवान श्रीकृष्ण को शिशु स्वरूप में पूजा जाता है। इस अवधि में उनके सोने-जागने का कोई निश्चित विधान नहीं होता, इसलिए मंदिर में रात्रिकालीन शयन आरती नहीं की जाती। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और भक्तगण इसे भावपूर्वक निभाते हैं।
नवमी से सज रही यशोदा माता की झांकी
मंदिर परिसर में जन्माष्टमी से पहले ही विशेष झांकियों का सिलसिला प्रारंभ हो गया था। नवमी तिथि से ही माता यशोदा की आकर्षक झांकी सजाई गई है। इसमें नंदबाबा के आंगन में खेलते नन्हे कान्हा का दर्शन श्रद्धालुओं को कराया जा रहा है। दिनभर भक्तजन बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचकर झांकी के दर्शन कर रहे हैं और “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से पूरा परिसर गूंज रहा है।
बछ बारस पर चांदी की पादुका और माखन मटकी फोड़ने की परंपरा
जन्माष्टमी के बाद मंदिर में सबसे बड़ा आयोजन बछ बारस पर होता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को चांदी की पादुका पहनाने की परंपरा है। विशेष पूजन-अर्चन के उपरांत बाल स्वरूप श्रीकृष्ण मंदिर के मुख्य द्वार पर माखन की मटकी फोड़ते हैं। यह परंपरा नंदगांव की उस लीलाओं की याद दिलाती है, जब छोटे-छोटे कान्हा अपने सखाओं के साथ माखन चोरी करते थे। माखन मटकी फोड़ने का यह कार्यक्रम भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इस वर्ष बछ बारस का यह आयोजन 20 अगस्त को होगा। आयोजन के बाद दोपहर में विशेष शयन आरती संपन्न की जाएगी।
उज्जैन में बछ बारस का धार्मिक उल्लास
उज्जैन में बछ बारस का पर्व अत्यंत धार्मिक आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं मंदिरों, आश्रमों और गोशालाओं में जाकर गाय और बछड़ों का पूजन करती हैं। मान्यता है कि इस दिन गाय-बछड़े की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि, संतान सुख और घर-आंगन में सदैव मंगलमय वातावरण बना रहता है। श्रद्धालु पूरे दिन व्रत-उपवास रखते हैं और भगवान श्रीकृष्ण के भजन-कीर्तन में डूबे रहते हैं।
भक्तिभाव से सराबोर माहौल
जन्माष्टमी से लेकर बछ बारस और एकादशी तक श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर का वातावरण पूरी तरह कृष्णमय बना रहता है। मंदिर के आंगन में झांकियां, श्रृंगार और भजन-कीर्तन से आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है। भक्तों का मानना है कि इस अवधि में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का दर्शन करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।