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महाकाल मंदिर में 17 सितंबर से शुरू होगा उमा-सांझी महोत्सव, 23 को निकलेगी उमा माता की भव्य सवारी; सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पारंपरिक अनुष्ठानों से सजेगा महाकाल परिसर!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इस साल का उमा-सांझी महोत्सव 17 सितंबर से शुरू होगा। यह आयोजन परंपरागत रूप से हर वर्ष पितृ पक्ष की एकादशी से अमावस्या तक किया जाता है और इस बार महोत्सव पांच दिनों तक चलेगा। मंदिर प्रबंधन समिति ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
सांस्कृतिक रंगों से सजेगा महाकाल परिसर
महोत्सव के दौरान मंदिर के सभा मंडप में धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होगा। परंपरा के अनुसार घट-स्थापना और वसंत पूजा की जाएगी। साथ ही प्राचीन पत्थरों पर पारंपरिक विधि से रंगोली और संझा सजावट की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल का अनुभव मिलेगा।
छात्रों के लिए प्रतियोगिताएं
दिन के समय महोत्सव में स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राओं को विशेष अवसर दिया जाएगा। उनके लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा, जिनमें शामिल हैं—
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चित्रकला प्रतियोगिता
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श्लोक पाठ प्रतियोगिता
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रंगोली प्रतियोगिता
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भाषण प्रतियोगिता
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपरा से जोड़ना है।
हर शाम महाकाल मंदिर का प्रांगण लोक कला और लोक नृत्यों से गूंजेगा। मंदिर समिति को इस बार देशभर से 75 कलाकारों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन कलाकारों में गायन, वादन और नृत्य विधाओं से जुड़े कई प्रतिभाशाली लोग शामिल हैं। आयोजन समिति इन आवेदनों की जांच कर फाइनल लिस्ट तैयार कर रही है।
जनसंपर्क अधिकारी आशीष पालवाडिया ने बताया कि मंदिर समिति ने 31 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए थे। उद्देश्य यही है कि महोत्सव में लोक परंपराओं और विद्याओं को मंच दिया जा सके।
महोत्सव का समापन 22 सितंबर को कन्या भोज के साथ होगा। इसके अगले दिन, यानी 23 सितंबर की शाम 4 बजे मंदिर प्रांगण से उमा माता की भव्य सवारी निकलेगी।
यह सवारी शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी, जिनमें शामिल हैं:
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महाकाल चौराहा
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तोपखाना
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दौलतगंज चौराहा
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सराफा
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छत्रीचौक
इसके बाद सवारी मां शिप्रा के तट तक पहुंचेगी, जहां जवारे और संझा का विसर्जन किया जाएगा। इसके बाद यह जुलूस कहारवाड़ी, बक्षी बाजार होते हुए वापस महाकालेश्वर मंदिर लौटेगा।
उमा-सांझी महोत्सव उज्जैन की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का अद्भुत संगम है। यह आयोजन न केवल भक्तों को देवी-देवताओं के प्रति भक्ति भाव से जोड़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी भारतीय लोक संस्कृति और कला की गहराइयों से परिचित कराता है। इस वर्ष भी महाकाल मंदिर परिसर एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उत्सव का साक्षी बनेगा।