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अब विद्यार्थियों के बनेंगे पहचान प्रमाण-पत्र
अब प्रदेश के सभी स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थियों के पहचान प्रमाण पत्र बनाया जाना जरूरी कर दिया है। इसमें छात्र का आधार नंबर और ब्लड ग्रुप की जानकारी देना जरूरी होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसा इसलिए किया है ताकि आपातकालीन स्थिति में किसी भी विद्यार्थी की पहचान आसानी से की जा सके। प्रदेश में 1 लाख से अधिक शासकीय स्कूल हैं जिनमें करीब 1 करोड़ विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। अब तक अनेक ऐसे शासकीय स्कूल हैं जहां विद्यार्थियों का पहचान प्रमाण-पत्र नहीं बनाया जाता है।
छात्र-छात्राओं के पहचान प्रमाण के लिए होने वाले काम पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) नजर रखेंगे। लोकशिक्षण आयुक्त नीरज दुबे ने इस संबंध में सभी डीईओ को निर्देशित कर दिया है। अब तक पहचान प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता नहीं थी लेकिन अब पहली बार इसे निश्चित फार्मेट में बनाया जा रहा है।
१२वीं तक के विद्यार्थी शामिल
विद्यार्थियों के पहचान प्रमाण-पत्र में उनकी आधारभूत जानकारी के अलावा आधार नंबर, ब्लड ग्रुप, पालक का मोबाइल नंबर, पता बताना होगा। खास बात यह है कि पहली से लेकर १२वीं तक के सभी विद्यार्थी को इसमें शामिल किया जाएगा।
इसलिए उठाया जा रहा कदम
अधिकारियों ने बताया कि आए दिन कई प्रकार की घटनाएं सामने आती हैं। इसकी वजह से कई बार छात्रों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती। पहचान प्रमाण-पत्र से उनके बारे में आपातकालीन स्थिति में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा दस्तावेज के रूप में भी विद्यार्थी इसका उपयोग कर सकेंगे।
निर्देशित किया है
काफी बच्चों के पास पहचान प्रमाण पत्र हैं। स्कूलों को निर्देशित कर दिया है। समयसीमा में कार्य पूरा करवा लिया जाएगा।