- महाशिवरात्रि से पहले उज्जैन में हाई अलर्ट: देवास गेट से रेलवे स्टेशन तक संयुक्त सर्च ऑपरेशन, 100 पुलिसकर्मी पांच टीमों में तैनात
- महाशिवरात्रि पर महाकाल दर्शन के लिए डिजिटल कंट्रोल रूम, गूगल मैप से तय होगा आपका रास्ता: जाम लगते ही मैप से गायब होगा रूट, खाली पार्किंग की ओर मोड़ दिया जाएगा ट्रैफिक
- महाकाल मंदिर में अलसुबह भस्मारती की परंपरा, वीरभद्र के स्वस्तिवाचन के बाद खुले चांदी के पट; पंचामृत अभिषेक और राजा स्वरूप में हुआ दिव्य श्रृंगार
- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर मुख्यमंत्री की सख्त समीक्षा, कहा - “काम में रुकावट नहीं चलेगी”; अधिकारियों को 24×7 सक्रिय रहने के दिए निर्देश
- महाकाल मंदिर में अलसुबह गूंजी घंटियां, वीरभद्र के कान में स्वस्तिवाचन के बाद खुले पट; भस्म अर्पण के बाद शेषनाग रजत मुकुट में सजे बाबा
आज ज्यादा चमकदार होगा चंद्रमा:आसमान में आज शाम 7 बजे साल का तीसरा स्ट्रॉबेरी सुपर मून दिखेगा
जेष्ठ पूर्णिमा के मौके पर गुरुवार शाम 7 बजे शहर के आसमान पर साल का तीसरा सुपर मून स्ट्रॉबेरी दिखाई देगा। यह सामान्य चंद्रमा से 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी ज्यादा चमकदार होगा। इस मून को पश्चिमी देशों में स्ट्रॉबेरी की हार्वेस्टिंग का मौसम होने के कारण स्ट्रॉबेरी मून नाम दिया गया है।
इसे हनी मून भी कहतेजेष्ठ पूर्णिमा के मौके पर गुरुवार शाम 7 बजे शहर के आसमान पर साल का तीसरा सुपर मून स्ट्रॉबेरी दिखाई देगा। यह सामान्य चंद्रमा से 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी ज्यादा चमकदार होगा। इस मून को पश्चिमी देशों में स्ट्रॉबेरी की हार्वेस्टिंग का मौसम होने के कारण स्ट्रॉबेरी मून नाम दिया गया है।
इसे हनी मून भी कहते हैं क्योंकि इस समय वहां हनी हार्वेस्ट करने के लिए तैयार हो जाता है। यूरोपीय देशों में जून्स फुल मून भी नाम दिया जाता है। पश्चिमी देशों में इसे रोज मून भी कहा जाता है। इसका यह नाम उदित होते फुल मून की लालिमा के कारण तथा कुछ क्षेत्रों में इस समय खिलने वाले गुलाब के कारण दिया गया है।
विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया यह इस साल का तीसरा सुपरमून होगा। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा अंडाकार पथ पर करते हुए 3.61.885 किमी से कम दूरी पर रहता है तो उस समय पूर्णिमा का चांद सुपरमून कहलाता है। यह माइक्रो मून की तुलना में 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार दिखता है। हैं क्योंकि इस समय वहां हनी हार्वेस्ट करने के लिए तैयार हो जाता है। यूरोपीय देशों में जून्स फुल मून भी नाम दिया जाता है। पश्चिमी देशों में इसे रोज मून भी कहा जाता है। इसका यह नाम उदित होते फुल मून की लालिमा के कारण तथा कुछ क्षेत्रों में इस समय खिलने वाले गुलाब के कारण दिया गया है।
विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया यह इस साल का तीसरा सुपरमून होगा। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा अंडाकार पथ पर करते हुए 3.61.885 किमी से कम दूरी पर रहता है तो उस समय पूर्णिमा का चांद सुपरमून कहलाता है। यह माइक्रो मून की तुलना में 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार दिखता है।