- महाशिवरात्रि से पहले उज्जैन में हाई अलर्ट: देवास गेट से रेलवे स्टेशन तक संयुक्त सर्च ऑपरेशन, 100 पुलिसकर्मी पांच टीमों में तैनात
- महाशिवरात्रि पर महाकाल दर्शन के लिए डिजिटल कंट्रोल रूम, गूगल मैप से तय होगा आपका रास्ता: जाम लगते ही मैप से गायब होगा रूट, खाली पार्किंग की ओर मोड़ दिया जाएगा ट्रैफिक
- महाकाल मंदिर में अलसुबह भस्मारती की परंपरा, वीरभद्र के स्वस्तिवाचन के बाद खुले चांदी के पट; पंचामृत अभिषेक और राजा स्वरूप में हुआ दिव्य श्रृंगार
- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर मुख्यमंत्री की सख्त समीक्षा, कहा - “काम में रुकावट नहीं चलेगी”; अधिकारियों को 24×7 सक्रिय रहने के दिए निर्देश
- महाकाल मंदिर में अलसुबह गूंजी घंटियां, वीरभद्र के कान में स्वस्तिवाचन के बाद खुले पट; भस्म अर्पण के बाद शेषनाग रजत मुकुट में सजे बाबा
इस्कॉन मंदिर
सन 2006 में सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर काफी भव्य है। यहाँ मुरली मनोहर और उनकी प्रेमिका राधा की बेहद खूबसूरत प्रतिमा है। इसके अलावा कृष्ण-बलराम और कृष्ण-रुक्मिणी की मूर्तियाँ भी बरबस आपका ध्यान आकर्षित कर लेती हैं। इस मंदिर की रूपरेखा और इस्कॉन मंदिर के प्रवर्तक पूज्यपाद गुरुजी की मनोहारी मूर्ति भी यहाँ स्थापित की गई है। हर इस्कॉन मंदिर की तरह यहाँ तुलसी बगीचा है, जिससे तुलसी की माला बनाई जाती है। इसके साथ ही मंदिर की छत पर कमल के फूल के ऊपर रासलीला में लीन श्रीकृष्ण और राधारानी का अद्भुत चित्रांकन है।
मंदिर की अपनी विशाल धर्मशाला है। यहाँ का नियम है कि यहाँ के सदस्य दस हजार रुपए जमा करवाने के बाद दुनियाभर के किसी भी मंदिर में साल में एक बार दो दिन के लिए रुक सकते हैं। इस दौरान अनुयायियों को सात्विक भोजन परोसा जाता है। इन सभी मंदिरों की खासियत यह है कि इनकी बनावट से लेकर आंतरिक संरचना तक को एक समान रखने की कोशिश की जाती है। आप दुनिया के किसी भी इस्कॉन मंदिर में जाएँ आपको यहाँ बेहद अपनापन महसूस होगा। इन सभी खासियतों के कारण इस्कॉन के प्रति देश-दुनिया के लोगों में अगाध श्रद्धा है।