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उज्जैन की माधवनगर पुलिस पीडि़त से यह मंगवाती है…
पुलिस आवेदन रख लेती है, सबूत भी पीडि़त के सहारे, पॉलीटेक्निक से पहले लड़की के अपहरण का मामला भी उलझाया
उज्जैन. पॉलीटेक्निक कॉलेज में महिला परीक्षक के साथ हुई बदसलूकी तथा परीक्षा के दौरान बाहरी युवकों द्वारा हंगामा किए जाने के मामले में थाना माधवनगर पुलिस ने पहली बार पीडि़त से साक्ष्य व जांच नहीं मांगी है बल्कि पहले भी ऐसा होता आया हैं। यहां पर कुछ महीने पहले नाबालिग लड़के द्वारा बेटी को भगाकर ले जाने की पिता की शिकायत पर भी पुलिस ने आवेदन लिया लेकिन कार्रवाई नहीं करते हुए उलझाए रखा।
पॉलीटेक्निक कॉलेज में परीक्षा के दौरान छात्र जिशान अहमद के नकल करने पर कॉपी लेकर महिला परीक्षक तपस्या ठाकुर द्वारा परीक्षार्थी को बाहर निकालने के बाद वह ५०-६० युवकों को लेकर कॉलेज आ गया था। इनके साथ कांग्रेसी नेता बबलू खींची भी आया था। परीक्षा की पवित्रता समाप्त होने व केंद्र पर हंगामा होने के मामले में महिला परीक्षक व प्राचार्य आरसी गुप्ता ने अलग-अलग आवेदन दिए। परीक्षक के आवेदन को अदम चेक में खारिज कर दिया तो प्राचार्य से जांच रिपोर्ट, साक्ष्य व हंगामा करने वालों के नाम लाने के बाद मुकदमा दर्ज करने की बात कही गई।
माधवनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराने के लिए आने वाले लोगों के साथ अक्सर पुलिस ऐसा करती है। अभी कुछ ही समय पहले की बात है जब संजय नामक व्यक्ति ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनकी 19 वर्षीय बेटी को एक नाबालिग लड़का अपहरण कर ले गया है। मामले में पुलिस ने शिकायती आवेदन लिया लेकिन एफआइआर दर्ज नहीं की। पुलिस ने संजय से ही कहा कि पहले बेटी से शादी करने वाले युवक की उम्र का प्रमाण-पत्र लाओ, इसके बाद ही कार्रवाई करेेंगे। जब उम्र का प्रमाण पत्र लेकर आए तो कहा कि बाल संरक्षण अधिकारी से नियमों की कॉपी लेकर आओ। यह भी पुलिस को दे दिए। इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि पुलिस को दिए दस्तावेज में सामने आया था कि शादी के वक्त युवक की उम्र 21 वर्ष से कम है और नियमानुसार 21 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति शादी नहीं कर सकता और बाल विवाह की श्रेणी में आता है। मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।