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उज्जैन में वैक्सीनेशन पिछड़ा:43% से भी कम को लगा पहला डोज, ज्यादातर हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर ने नहीं लगवाया सेकेंड डोज
कोरोना वैक्सीनेशन की रफ्तार शहर में बहुत धीमी है। 25 लाख से ज्यादा आबादी वाले जिले में अब तक 10 लाख 71 हजार लोगों को ही पहला डोज लग सका है। यह कुल आबादी का 42.84% है, यानि जिले की आधी आबादी तक भी पहला डोज नहीं पहुंचा है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर के दौरान हालात अंसतुलित होने की आशंका है।
उज्जैन के लिए यह अच्छी बात है, पिछले करीब डेढ़ महीने से यहां एक भी कोरोना का मरीज या एक्टिव केस नहीं है, लेकिन अन्य राज्यों से सीधा संपर्क होने व महाकाल में देशभर व खासकर ऐसे राज्यों जहां एक्टिव केस की संख्या अधिक है, वहां के पर्यटक उज्जैन पहुंच रहे हैं। इनकी जांच की व्यवस्था प्रशासन ने नहीं की है। इस वजह से कोरोना का खतरा कम नहीं माना जा सकता।
प्रशासन के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में अब तक 2.54 लाख लोगों को दूसरा डोज भी लग चुका है। यही गति रही तो शहर को शत प्रतिशत वैक्सीनेटेड होने में एक साल का समय लग सकता है। जिले में कोरोना पॉजीटिविटी दर 4.4% है। इनमें से अब तक 171 की मौत हुई है, जो कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या का 1 फीसदी से भी कम है।
फ्रंटलाइन वर्कर व स्वास्थ्यकर्मी भी नहीं हुए पूरी तरह वैक्सीनेटेड
जिले के 14880 स्वास्थ्यकर्मियों को पहला डोज लग चुका है, लेकिन 10 हजार 811 कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें दूसरा डोज लगा है। यानी 4 हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी ऐसे हैं, जिन्हें अभी दूसरा डोज लगना बाकी है। ऐसे में तीसरी लहर आती है, तो हेल्थ वर्कर्स को पहले सुरक्षित करना होगा। इसी तरह, जिले के 20 हजार फ्रंटलाइन वर्कर को पहला डोज मिल चुका है। इनमें से 14 हजार 360 वर्कर ऐसे हैं, जिन्हें दूसरा डोज लगा है। फ्रंटलाइन वर्कर्स में भी 5600 से अधिक को दूसरे डोज की दरकार है।
आबादी के हिसाब से ऐसे समझें कितने लोग सुरक्षित
कोरोना की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा पीड़ित युवा वर्ग रहा। इस वजह से वैक्सीन लगवाने में युवा आगे हैं। 18 से 44 वर्ष के युवाओं के लिए 3 मई से शुरू हुए वैक्सीनेशन कार्यक्रम के तहत अब तक 6 लाख 39 हजार 337 युवाओं को वैक्सीन का पहला डोज मिल चुका है, लेकिन युवा वर्ग दूसरा डोज लेने में पिछड़ा है।
वैक्सीनेशन शुरू होने के 105 दिन बाद भी केवल 51 हजार युवाओं ने ही दूसरा डोज लगवाया है, जबकि 45 से अधिक उम्र के लोग दूसरा डोज लगाने में आगे हैं। 45 से अधिक उम्र वाले 4 लाख 7 हजार लोग पहला तो 1 लाख 84 हजार लोग दूसरा डोज भी लगवा चुके हैं। इतना ही नहीं, उज्जैन में अब तक 2452 को गर्भवतियों को पहला डोज लग चुका है।