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कठिन है चुनावी ‘सफर’:23 जून से 9 जुलाई के बीच 10 दिन 250 बसें रहेंगी, चुनावी ड्यूटी में
- असुविधा से बचने के लिए समय बदले या दूसरा विकल्प तैयार रखें
- पहले चरण का मतदान 25 जून को, दूसरे का 1 जुलाई व तीसरे का 8 जुलाई को है
23 जून से 9 जुलाई के बीच के 10 दिनों तक बसों का सफर मुश्किल हो सकता है। क्योंकि करीब 250 बसें पंचायत चुनाव के लिए अधिगृहीत की जा रही है। ये यात्री व स्कूली बसें हैं। अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिले में पंचायत चुनाव तीन चरणों में होने है। पहले चरण का मतदान 25 जून को, दूसरे का 1 जुलाई व तीसरे का 8 जुलाई को है। ऐसे में मतदान दलों व सुरक्षाकर्मी को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए हर बार के लिए औसतन 250 बसें अधिगृहीत की जा रही है। इनके अलावा मतदान सामग्री के लिए कुछ ट्रक व संकरी गलियों व स्थानों के मतदान केंद्रों के लिए टाटा मैजिक भी अधिगृहीत हो रहे हैं।
परिवहन कार्यालय द्वारा बसों के अधिग्रहण के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई हैं। माना जा रहा हैं कि जिस दिन मतदान होगा उसके सहित तीन दिन के लिए बसें व अन्य वाहन अधिगृहीत रहेंगे। ऐसे में तीनों चरणों के मतदान के लिए करीब 10 दिन तक बसें अधिगृहीत रहेंगी। लिहाजा आशंका है कि जिले से 250 बसें अधिगृहीत होने से कुछ रूटों के सफर के लिए परेशानी हो सकती है। क्योंकि जिले से विभिन्न रूटों पर करीब 550 बसें संचालित होती है। इन्हीं में से और कुछ स्कूलों से जुड़ी बसें अधिगृहीत की जा रही है। ऐसे में उक्त दिनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए अपना शेड्यूल बदलना पड़ सकता है।
जानें किन दिनों के लिए बसें अधिगृहीत रहेंगी
- पहले चरण का मतदान 25 जून को- बसें 23 जून की शाम को अधिगृहीत हो जाएगी। 24 को मतदान दलों को लेकर रवाना होंगी और 25 जून को रात में लौटेंगी।
- दूसरे चरण का मतदान 1 जुलाई को- 29 जून को बसें अधिगृहीत होंगी। 30 जून को मतदान दलों को लेकर रवाना होंगी और एक जुलाई की रात को लौटेंगी।
- तीसरे चरण का मतदान 8 जुलाई को- 6 जुलाई को बसें अधिगृहीत होंगी और 7 को मतदान दलों को ले जाएंगी। इसके बाद 8 जुलाई की रात को लौटेंगी।
डीजल चार गुना महंगा, किराया बढ़ाएं
इधर मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन निर्वाचन और शासकीय कामों में अधिगृहीत की जाने वाली बसों के किराए में वृद्धि की मांग कर रहा है। एसोसिएशन के संभागीय प्रभारी शिव कुमार शर्मा ने बताया कि निर्वाचन और शासकीय कामों के लिए अधिगृहीत की जाने वाली बसों का किराया 2018 में निर्धारित हुआ था और वहीं चल रहा है। तब डीजल 26 रुपए लीटर था और अब कीमत चार गुना है। साथ ही पार्ट्स व मेंटेनेंस का भी खर्चा बढ़ गया है। शासन से डीजल की कीमत की तुलनात्मक दर बढ़ाने की मांग की है।
अधिग्रहण शुरू किया
चुनावी कार्य के लिए बसों का अधिग्रहण शुरू कर दिया गया हैं। फिलहाल पंचायत चुनाव के लिए अधिग्रहण के आदेश हैं। इनके अधिग्रहण से यात्रियों की परिवहन व्यवस्था में कोई परेशानी नहीं आएगी।