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- कबीर नाम के इस्तेमाल पर बढ़ा विवाद: संतों ने बीफ निर्यातक कंपनी का नाम बदलने की मांग, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
कबीर नाम के इस्तेमाल पर बढ़ा विवाद: संतों ने बीफ निर्यातक कंपनी का नाम बदलने की मांग, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कबीर पंथ महासंघ की बैठक के बाद बीफ निर्यातक कंपनी अल कबीर लिमिटेड के नाम को लेकर नया विवाद सामने आया है। महासंघ ने कंपनी के नाम में प्रयुक्त “कबीर” शब्द पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे करोड़ों कबीर पंथ अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय बताया है। संगठन का कहना है कि सद्गुरु कबीर साहेब शांति, समानता और मानवता के प्रतीक हैं, इसलिए उनके नाम का उपयोग मांस से जुड़े व्यवसाय के साथ नहीं किया जाना चाहिए।
महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत चूड़ामणि साहेब, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत राधाकिशन सोलंकी साहेब सहित कई संत-महंतों की उपस्थिति में हुई बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में कहा गया कि संगठन लंबे समय से इस विषय को गंभीरता से उठा रहा है और अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
महासंघ का कहना है कि कबीर पंथ के अनुयायी सद्गुरु कबीर साहेब को अपनी सर्वोच्च आस्था का केंद्र मानते हैं। ऐसे में किसी बीफ निर्यातक कंपनी के नाम में “कबीर” शब्द का उपयोग उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। संगठन ने इसे केवल व्यापारिक नाम का मामला नहीं, बल्कि आस्था और सम्मान से जुड़ा विषय बताया है।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि संगठन का विरोध किसी राजनीतिक दल, सरकार या किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है। महासंघ के अनुसार उनका उद्देश्य केवल सद्गुरु कबीर साहेब के नाम और सम्मान की रक्षा करना है। संगठन ने सभी समर्थकों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है।
महासंघ ने अपनी मांगों के तहत सबसे पहले बीफ निर्यातक कंपनी के नाम से “कबीर” शब्द हटाने की मांग की है। इसके साथ ही संगठन ने सद्गुरु कबीर साहेब के प्राकट्य दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने तथा शैक्षणिक पुस्तकों में “कबीर दास” के स्थान पर सम्मानपूर्वक “सद्गुरु कबीर साहेब” लिखे जाने की भी मांग रखी है।
महासंघ की महिला इकाई की राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत माया साहेब ने कहा कि इन मांगों को लेकर देशभर के कबीर पंथ अनुयायी एकजुट हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक संगठन की मांग नहीं बल्कि लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा विषय है, इसलिए सरकार और संबंधित संस्थाओं को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
बैठक में मौजूद संतों ने चेतावनी दी कि यदि कंपनी के नाम में बदलाव नहीं किया गया तो पहले शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद देशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। महासंघ ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर दिल्ली के रामलीला मैदान में भी बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न राज्यों से अनुयायी शामिल हो सकते हैं।
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि इससे पहले देवास में “कबीर चिकन सेंटर” नाम को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया था। उनका कहना है कि उस घटना के बाद उन्हें अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार के नामों की जानकारी मिली, जिसके चलते अब इस विषय को व्यापक स्तर पर उठाया जा रहा है।
संतों का कहना है कि सद्गुरु कबीर साहेब ने अपने जीवन में प्रेम, भाईचारा, सत्य, अहिंसा और सामाजिक समानता का संदेश दिया था। इसलिए उनके नाम को ऐसे किसी व्यवसाय से जोड़ना, जो उनके विचारों के विपरीत माना जाता है, उचित नहीं है। संगठन ने इस विषय पर संबंधित कंपनी और सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई है।
महासंघ ने दावा किया कि यदि उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाले कबीर पंथ के अनुयायी आंदोलन में शामिल होंगे। संगठन का कहना है कि भविष्य की रणनीति चरणबद्ध तरीके से तय की जाएगी और सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किए जाएंगे।
फिलहाल यह मामला धार्मिक आस्था, व्यापारिक नाम और अभिव्यक्ति से जुड़े अधिकारों के बीच संतुलन का विषय बन गया है। आने वाले समय में संबंधित पक्षों और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर रहेगी।