- महाकाल मंदिर का नंदी हॉल बदलेगा रूप, 20 लाख की लागत से होगा सौंदर्यीकरण; सावन से पहले पूरा करने की तैयारी
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती के नाम पर फिर ठगी, गुजरात की दो महिलाओं से 42 हजार रुपए वसूले; पुलिस ने शुरू की जांच
- शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन के शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 1000 लीटर से ज्यादा तेल चढ़ा; घाटों से हटाए गए कपड़े और जूते-चप्पल
- “मैं पापा के साथ जाऊंगा…”: उज्जैन कोर्ट में मासूम की जिद के बाद पिता संग भैरवगढ़ जेल पहुंचा 4 साल का बच्चा
- बाबा महाकाल के दरबार में पहुंची भारतीय महिला क्रिकेट टीम, कप्तान हरमनप्रीत कौर समेत खिलाड़ियों ने भस्म आरती में लिया आशीर्वाद
करोड़ों रुपए की सोयाबीन उपज खेतों में लहलहा रही
उज्जैन| करोड़ों रुपए की सोयाबीन उपज खेतों में लहलहा रही है। इस समय इन पर इल्ली वाली बीमारी भी लगने लगी है। किसान पानी रुकने के बाद खेतों में उपज का जायजा लेकर कीटनाशक महंगे भाव की दवा का डोज भी दे रहे हैं। मालवा क्षेत्र सोयाबीन का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। 25 साल से किसान इस उपज को पसंद कर इसी पर अपना भाग्य आजमाते हैं। लागत खर्च बढ़ने के बाद भी सोना उपज को कोई छोड़ना भी नहीं चाहता। अक्टूबर में तैयार होने वाली उपज अभी से बंपर बताई जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में बिकने वाली उपज मालवा से विदेशों में भी पहुंचती है। अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ बनने से इसकी एक्सपोर्ट मांग देश के खास मालवा में बनी रहती है। एक्सपोर्ट सोयाबीन का लदान करने वाले व्यापारी अशोक कुमावत ने बताया 75 से 100 रुपए क्विंटल फायदे वाला व्यापार एक्सपोर्ट का ही होता है। ग्रेडिंग पीला चमकदार सोयाबीन ही खरीदकर भेजा जाता है। हरा दाना मान्य नहीं है।
काली-पीली सोयाबीन आती थी : वर्षों पूर्व शुरू हुई सोयाबीन काली और पीली दो प्रकार की होती थी। 600 से 700 रुपए के भाव से शुरुआत में बिकने वाली के अब भाव 3500 से 4000 रुपए तक के मिलने लगे। सोयाबीन उपज से आबाद मालवा की समृद्धि का कारण सोयाबीन ही माना जाता है। अब लागत ज्यादा होने से लाभ कम हो गया।