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कर्नाटक के दो श्रद्धालुओं को भस्मारती मामले में थाने भेजा
उज्जैन। आज सुबह भस्म आरती के समय कर्नाटक के 2 श्रद्धालु बगैर अनुमति पत्र के भस्मारती लाइन में लग गए और जब अधिकारियों ने उनसे अनुमति पत्र के बारे में पूछा तो कहा कि कलेक्टर कार्यालय से उनकी अनुमति बनी है। दोनों श्रद्धालुओं द्वारा दी गई जानकारी पर ड्यूटीरत नायब तहसीलदार सुरेश नागर को शंका हुई तो उन्होंने दोनों श्रद्धालुओं को पूछताछ में लिया तो श्रद्धालु विग्नेश पिता योगेश कामत 27 वर्ष एवं भाई संकेत कामत ने बताया कि वह ग्राम कुर्की कर्नाटक के निवासी हैं तथा सब्जी का कारोबार करते हैं यहां महाकालेश्वर दर्शन के लिए उन्होंने अपने मित्र आकाश से संपर्क किया था तथा आकाश ने प्रदीप खन्ना नामक व्यक्ति से मिलकर कलेक्टर के जरिए हमारी अनुमति बनवाई है। दोनों युवकों को थाने भिजवाया गया तथा अनुमति रजिस्टर देखा गया तो उनके नाम की अनुमति कलेक्टर प्रोटोकॉल से बनी हुई थी खाने पर कथन दर्ज करने के बाद दोनों युवकों को भस्म आरती के लिए मंदिर में प्रवेश दिया गया।
वीआईपी आवेदनों पर प्रोटोकॉल से अनुमति
इस संबंध में कलेक्टर प्रोटोकॉल से जुड़ें मंदिर कर्मचारी अभिषेक भार्गव से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बाहर से भी सांसद, मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के पत्र आते हैं उस आधार पर प्रतिदिन 100 से डेढ़ सौ अनुमतियां भस्म आरती के लिए बनाई जाती है यह भी इस तरह का मामला है।
एसडीएम को सक्रिय मिले थे दलाल
अधिकारियों शंका इस आधार पर हुई थी की शनिवार को ही एसडीएम अनिल बनवारीया तथा पूर्व प्रशासक प्रदीप सोनी को मंदिर के बाहर रात 3 बजे फूल प्रकाश प्रसाद बेचने वाले युवक ने अनुमति बनवाने की बात कही थी तथा प्रति व्यक्ति 1000 रुपये की मांग की थी। अत: इस आशंका में युवकों से पूछताछ की गई कि कहीं उन्होंने अनुमति पैसे देकर को नहीं बनवाई हालांकि दोनों कर्नाटक के युवाओं ने थाने में अपने कथन में कहा कि उन्होंने किसी को कोई पैसे नहीं दिए।
अनुमति के रेफरेंस की जांच होगी
कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि हमारा उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को भस्मारती अनुमति जारी कर दर्शन करवाना है। बाहरी श्रद्धालु तो यहां श्रद्धा से आते हैं, लेकिन अनुमति बनवाने के नाम पर यही गड़बड़ होती है, मैं रेफरेंस भी दिखावा रहा हूं की अनुमति प्रोटोकॉल से बनी है तो किसके द्वारा अनुशंसा की गई है। गड़बड़ मिली तो संबंधित की भस्म आरती अनुमति बंद की जाएगी।