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कान्ह का दूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए स्टापडेम का प्रस्ताव तैयार
6 से 8 महीने में बन सकता है स्टापडेम …
अक्षरविश्व प्रतिनिधि.उज्जैन। कान्ह के जरिए इंदौर की तरफ से आने वाले गंदे पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए करीब ४.७५ करोड़ रु. की लागत से स्टापडेम निर्माण का प्रस्ताव तैयार हो गया है। सबकुछ ठीक रहा तो एजेंसी तय होने के बाद ६ से ८ महीने में स्टापडेम बन सकता है। शिप्रा की पवित्रता के लिए संतों-महंतों के आन्दोलन का प्रभाव नजर आने लगा है। भोपाल से आए अधिकारियों द्वारा हकीकत देखने के बाद अब कान्ह पर शनि मंदिर के पीछे गोठड़ा स्टापडेम बनाने के लिए गतिविधियों में तेजी आ गई है। जल संसाधन विभाग ने पक्के स्टाप डेम का प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
स्टापडेम की लागत 4 करोड़ 75 लाख रुपए प्रस्तावित की गई है। यह 62 मीटर लंबा और साढ़े पांच मीटर ऊंचा रहेगा। माना जा रहा है कि प्रशासन उक्त स्टापडेम का निर्माण स्मार्ट सिटी की मद से करवाएगा। करीब दो साल पहले से जल संसाधन विभाग द्वारा इस तरह का एक प्रस्ताव शासन को स्वीकृति के लिए भेजा गया था लेकिन वह वहां पेंडिंग ही है। लिहाजा प्रशासन स्थानीय व अपने स्तर से इनका निर्माण करवाने की प्लानिंग कर चुका है। एजेंसी तय होने के बाद उम्मीद है कि स्टापडेम 6 से 8 महीने में तैयार हो जाएगा। बता दें कि बीती शनिश्चरी अमावस्या पर कान्ह के गंदे पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए त्रिवेणी पर बनाया गया कच्चा बांध ढह गया था। इससे स्नान के लिए लाया गया नर्मदा का पानी दूषित भी हो गया। श्रद्धालुओं को मजबूरन दूषित पानी में ही स्नान करना पड़ा था। इससे नाराज संतों ने शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने की ठोस योजना की मांग को लेकर आन्दोलन प्रारंभ कर दिया था। जल संसाधन मंत्री और उच्चशिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद संतों-महंतों का आन्दोलन खत्म हुआ था।
फिर मिट्टी का बांध

मकर संक्रांति 15 जनवरी 2022 को है। संक्रांति का पर्व स्नान साफ पानी में हो इसके लिए अभी से कवायद प्रारंभ हो गई है। रामघाट और अन्य घाटों पर मकर संक्रांति का स्नान नर्मदा-शिप्रा के स्वच्छ जल में हो इसके लिए गोठड़ा में मिट्टी का बांध बनाकर कान्ह का गंदा पानी शिप्रा में मिलने से रोकने के निर्देश जल संसाधन विभाग को
दिए गए है।