कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल माधवनगर में कोरोना टेस्ट के लिए करना होगा अभी और इंतज़ार

ट्रूरू-नेट मशीन आई, न्यूट्रीलाईजर नहीं आया
शासकीय माधवनगर हॉस्टिल में सोमवार शाम को ट्रूरू-नेट मशीन आ गई। यह टीबी और एचआईवी का टेस्ट करने वाली मशीन के अपडेशन के साथ आई है। इस मशीन से अब कोरोना का टेस्ट होगा। यह मशीन एक दिन में अधिकतम 30 और बहुत अधिक काम करने पर 40 जांच ही कर सकेगी। लेकिन जांच का काम फिलहाल एक सप्ताह तक नहीं होगा।
इसका मुख्य कारण है इस मशीन की एक सहायक मशीन न्यूट्रीलाईजर का नहीं आना। जो ट्रूरू-नेट मशीन आई है,वह मशीन माधवनगर अस्पताल में केवल कोरोना की जांच करेगी। पहले इस मशीन से टीबी एवं एचआईवी की जांच की जाती थी, अत: आयसीएमआर की अनुशंसा पर संबंधित कम्पनी ने इसे अपडेट किया है और अब यह कोरोना की जांच भी कर सकती है। इस मशीन की सहायक मशीन न्यूट्रीलाईजर को दिल्ली की संबंधित कम्पनी ने अभी तक उज्जैन नही भेजा है। ऐसे में ट्रूरू-नेट मशीन से फिलहाल कोरोना की जांच करना संभव नहीं है।
शासकीय माधवनगर हॉस्पिटल के प्रभारी डॉ. भोजराज शर्मा के अनुसार ट्रूरू-नेट मशीन से कोरोना की जांच प्रारंभ होने के बाद भी आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में कोरोना के टेस्ट होते रहेंगे। वहां अधिकतम सीमा 300 टेस्ट प्रतिदिन की है। जबकि ट्रूरू-नेट से 40 टेस्ट अधिकतम किए जा सकते हैं। आने वाले समय में यह होगा कि आवश्यक एवं तात्कालिक जांच शासकीय माधवनगर अस्पताल में करेंगे और दूसरी जांच आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में चलती रहेगी। इस मशीन से गर्भवती महिलाओं की जांच तात्कालिक की जाएगी, ताकि जच्चा-बच्चा को सुरक्षित किया जा सके।
24 घण्टे काम चलेगा शासकीय माधवनगर अस्पताल की लेब में
डॉ.शर्मा ने बताया कि माधवनगर हॉस्पिटल को शासन ने डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल बनाया है। इसी अनुरूप अनुसार यहां पर एक कोरोना जांच की प्रयोगशाला होना आवश्यक हंै। यही कारण है कि हॉस्पिटल के एक कक्ष को प्रयोगशाला बना दिया गया है। आवश्यक उपकरण एवं स्टॉफ आ गया है। यहा पर 24 घंटे जांच का काम चलेगा। स्टॉफ तीन पारियों में काम करेगा।
इस तरह काम करता है न्यूट्रीलाईजर
ट्रू रू नेट मशीन से जांच करने के बाद जो बायो केमिकल वेस्ट निकलता है, उसको नष्ट करना अनिवार्य होता है। उसे यदि रखा जाए तो वह घातक हो सकता है और लिंक होने पर संक्रमण फैला सकता है। न्यूट्रीलाईजर एक सहायक मशीन होती है जोकि जांच पश्चात निकले बायो मेडिकल वेस्ट को नष्ट कर देती है। जांच पश्चात तरल पदार्थ इस मशीन में डाला जाता है। मशीन में निकलने वाली अल्ट्रा वायलेट किरणों के कारण बायो मेडिकल वेस्ट में शेष बचे वायरस आदि संक्रमित पदार्थ नष्ट हो जाते है। ऐसे में इस वेस्ट से बाद में संक्रमण फैलने का खतरा नहीं होता है।
आरडी गार्डी में जांच का खर्च हुआ कम
सी एमएचओ ने बताया कि राज्य शासन ने कोरोना की जांच करने की कीट प्रदाय करना प्रारंभ कर दिया है। सीएमएचओ कार्यालय से आरडी गार्डी कॉलेज को कीट दी जाती है। इसका लाभ यह हुआ है कि एक जांच के पूर्व में मेडिकल कॉलेज को 2500 रू. देना होते थे। अब एक जांच के 1500 रू. देना पड़ते हैं। माधवनगर हॉस्पिटल में चूंकि मशीन, स्टॉफ एवं कीट शासन का ही है, अत: यहां जांच के रूपये बचेंगे। इसका दीर्घकालीन लाभ भी होगा।