- उज्जैन में शीतला माता पूजन का उत्साह, मंदिरों में उमड़ी महिलाओं की भीड़; एक दिन पहले तैयार किया जाता है भोजन
- महाकाल मंदिर में टीवी अभिनेत्री कनिका मान ने किए दर्शन, भस्म आरती में हुईं शामिल
- राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म अर्पित होते ही गूंजा ‘जय श्री महाकाल’; बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किए दर्शन!
- वीरभद्र जी को स्वस्ति वाचन के बाद शुरू हुई भस्म आरती, शेषनाग मुकुट और मुण्डमाला में सजे बाबा महाकाल
- रंगपंचमी पर महाकाल मंदिर में बदली व्यवस्था, भस्म आरती में सिर्फ एक लोटा केसर रंग अर्पित होगा; भक्तों को रंग लाने की नहीं होगी अनुमति!
खतरों के बीच ऐसा त्याग:घर वालों को नहीं पता हम कोरोना से मृत लोगों की लाशें ढो रहे
जब लोग घरों में हैं तब 40 डिग्री तापमान में भी सुबह से रात तक संक्रमित शवों को उठाकर मोक्षधाम पहुंचाने की अगर कोई हिम्मत कर रहा है तो असल में कोरोना योद्धा वही है। शर्मनाक है कि जान दांव पर लगाने वाले ऐसे योद्धाओं की जिंदगी और उसके परिवार की चिंता नगर निगम काे नहीं है। मात्र 6 से 7 हजार रुपए वेतन में काम कर रहे इन कर्मचारियों को संक्रमण से बचाव के लिए जो किट दी जा रही है, वह दोयम दर्जे की है। शवों को उठाने, रखने में ही फट रही है। ऐसे में जिम्मेदार यह बताएं कि इससे संक्रमण कैसे रुकेगा।
मजबूरी ऐसी
निगम द्वारा सैनिटाइजर आदि उपलब्ध नहीं कराने के सवाल पर कर्मचारी बोले- हमें हमारे हाल पर छोड़ दो…आप हमारा फोटो छाप दोगे तो घरवाले घर से निकलने नहीं देंगे। लॉकडाउन में काम छूट गया है। भूख तो सबको रोज लगती है, झूठ बोलकर यह काम कर रहे हैं ताकि परिवार चला सका। हाथ जोड़ते हैं हमारा नाम या फोटो मत छापना।