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चुनाव बहिष्कार पर अड़े ग्रामीण
जिम्मेदार कौन, मामला गोंदिया ट्रेंचिंग ग्राउंड का
उज्जैन। प्रशासन लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करने का दावा कर रहा है लेकिन गोंदिया स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड को लेकर चुनाव का बहिष्कार कर रहे गांवों की समस्या तक अब तक हल नहीं हुई।
नतीजतन पांच गांव के हजारों ग्रामीण अब भी वोट नहीं करने पर अड़े नजर आए। रविवार को इन गांवों में मतदान नहीं हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी।
ट्रेंचिंग ग्राउंड हटाने की मांग को लेकर १५ अप्रैल को ग्राम गोंदिया, हासामपुरा, राणाबड़, गंगेडी व ब्रजराजखेड़ी के ग्रामीण चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया था। प्रशासन ने दावा किया था कि ३० अप्रैल तक समस्या का समाधान कर ग्रामीणों से चर्चा करेंगे। हकीकत में न समस्या सुलझी और न अधिकारियों ने गंभीरता से ग्रामीणों को समझाने कोई रूचि दिखाई। नतीजतन शनिवार सुबह जब अक्षरविश्व ने ग्रामीणों से चर्चा की तो उन्होंने वोट डालने से इंकार कर दिया।
सर्वविदित है कि टं्रेचिंग ग्राउंड की बदबू और जलाए जाने वाले कचरे का धुआं १४ गांव तक पहुंचता है। अत्याधिक प्रभावित पांच गांव के लोगों ने ट्रेंचिंग ग्राउंड के कारण लगातार मौत होने तक के आरोप लगाए है। इस संबंध में कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी शशांक मिश्र से चर्चा का प्रयास किया लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
दो माह में भी हल नहीं
ट्रेचिंग ग्राउंड से उत्पन्न समस्या को देखते हुए १५ मार्च को अक्षरविश्व ने मुहिम शुरू की। इस पर १९ मार्च को ग्रामीण भी साथ आ गए। आंदोलन शुरू कर पोस्टर अभियान चलाया। मुख्यमंत्री से राष्ट्रपति को पत्र और कलेक्टर शशांक मिश्र को ज्ञापन तक दिया। चुनाव बहिष्कार की घोषणा पर बीजेपी-कांग्रेस ने भी चिंता जताई। ग्र्रामीणों ने ११ मई को बीएलओ से मतदान पर्ची नहीं ली। एसडीएम गांव जरूर पहुंचे लेकिन हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण
ट्रेंचिंग ग्राउंड शुरू होने के बाद से ही गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। अब तक 73 लोगों की मौत भी हो चुकी है। बावजूद प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है।- रायसिंह चौधरी, ग्राम गोंदिया
ट्रेंचिंग ग्राउंड हटने तक वोट नहीं डालने का कहा था। प्रशासन ने समस्या हल नहीं की, इसलिए चुनाव का बहिष्कार जारी रहेगा।- मदनलाल तिलोरिया, गोंदिया
प्रशासन ने अब तक समस्या के हल करने का प्रयास ही नहीं किया इसलिए सभी ने एकमत होकर वोट नहीं डालने का निर्णय लिया है।- दीपक शर्मा, ब्रजराजखेड़ी
जब हमारी समस्या का हल ही नहीं होना है तो फिर वोट डालने से क्या मतलब। चुनाव के बाद आंदोलन भी करेंगे।
– पापूसिंह आंजना, राणाबड़