- 40° के पार तापमान, फिर भी नहीं थमी आस्था: महाकाल में रोज 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालु; पहली बार महाकाल लोक में शुरू हुआ फोगिंग सिस्टम
- उज्जैन की 5 माह की बच्ची SMA-1 से जूझ रही: 15 करोड़ के इंजेक्शन के लिए जंग, सोनू सूद ने बढ़ाया हाथ; भोपाल एम्स में चल रहा इलाज
- 15 साल पहले खत्म हो चुकी थी लीज; हाईकोर्ट से स्टे हटते ही UDA का एक्शन, बेगमबाग में 5 मकान तोड़े; अब तक 30 से ज्यादा निर्माण हटाए जा चुके
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: स्वस्ति वाचन के बाद खुले पट, पंचामृत अभिषेक के बाद पुष्पों से दिव्य श्रृंगार
- सप्तसागर विकास को गति देने के निर्देश: निगम आयुक्त ने चार प्रमुख जलाशयों का किया निरीक्षण, गहरीकरण-सौंदर्यीकरण पर जोर
नकली बीड़ी बेचने शिवपुरी से आये युवकों को कंपनी के चैकिंग अधिकारी ने पकड़ा
पहले भी बेच चुके थे, लॉकडाउन में नौकरी गई तो करने लगे यह काम
उज्जैन। शिवपुरी से हजारों की नकली बीड़ी के पैकेट लेकर उज्जैन में बेचने आये दो युवकों को कंपनी के चैकिंग अधिकारी ने देवासगेट पर रंगे हाथों पकड़ा। देवासगेट पुलिस को सूचना देकर दोनों को गिरफ्तार कराया। पुलिस ने युवकों के पास से नकली बीड़ी के 500 बंडल बरामद किये हैं।
पुलिस ने बताया कि भारत बीड़ी वक्र्स प्रा.लि. कर्नाटक कंपनी के चैकिंग अधिकारी हरगोविंद पिता लक्ष्मण राठौर निवासी झांसी ने थाने में शिकायती आवेदन दिया था कि दो युवक शिवपुरी से नकली बीड़ी के बंडल लेकर उज्जैन में बेचने आये हैं। दोनों युवक देवासगेट पोस्ट ऑफिस के सामने बोरी लेकर खड़े हैं। पुलिस टीम तुरंत यहां पहुंची और अखिलेश पिता अजय मोहन सक्सेना (38 वर्ष) निवासी शिवपुरी व उसके साथी जितेन्द्र को हिरासत में लिया। उसके पास से बरामद बोरी में रखे बीड़ी के बंडलों की जांच हरगोविंद ने अल्ट्रावाइलेट लैंस से की और पुलिस को बताया कि यह बीड़ी नकली है। दोनों युवकों को पुलिस थाने लेकर आई और इनके कब्जे से बोरी में भरे 125 नग बंडल कीमत 33500 रुपये की बरामद कर ट्रेड मार्क एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया।
200 में खरीदा नकली पैकेट 260 में बेचना था
अखिलेश ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उसने शिवपुरी के विजय राठौर नामक व्यक्ति से नकली बीड़ी का एक पैकेट 200 रुपये के हिसाब से खरीदा था। यही पैकेट 260 रुपये के हिसाब से उज्जैन में पंकज भैय्या को बेचना थे। अखिलेश लॉकडाऊन के पहले कलाली पर नौकरी करता था। अनलॉक होने के बाद उसे वापस काम नहीं मिला तो वह नकली बीड़ी बेचने का काम करने लगा। उसका साथी जितेनद्र पहले भी कम मात्रा में नकली बीड़ी उज्जैन लाकर पान की दुकान संचालकों को बेच चुका है।