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नहीं मिला स्ट्रेचर तो कर्मचारी उठाकर ले गए एम्बुलेंस तक…
उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिये प्रशासन व पुलिस द्वारा किये गये प्रबंध के दावों की पोल उस समय खुल गई जब मंदिर में दर्शन कर लौट रहा वृद्ध निकास द्वार से 50 मीटर पहले परिसर में चक्कर खाकर गिरा। उसके सिर में चोंट लगने के बाद खून निकलने लगा।
आसपास से गुजर रहे श्रद्धालुओं ने मदद की गुहार लगाते हुए 4 लोगों को एकत्रित किया व परिसर में मौजूद डॉक्टरों के पास ले गये। यहां डॉक्टरों ने वृद्ध का उपचार न करते हुए उसे जिला चिकित्सालय ले जाने की बात कही। यहां स्ट्रेचर नहीं मिलने से लोग वृद्ध को हाथ पैर पकड़कर टांगते हुए पुन: निकास द्वार तक आये इस दौरान वृद्ध को 5 जगह लोगों ने जमीन पर रखा जिसके बाद एम्बुलेंस में डालकर उन्हें जिला चिकित्सालय ले जाया गया यहां परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने वृद्ध को मृत घोषित कर दिया। खास बात यह कि रविवार को भी सुबह एक वृद्ध की दर्शन से लौटने के बाद मंदिर परिसर में मृत्यु हो चुकी है।

मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु व एक सुरक्षाकर्मी ने घायल श्रद्धालु को हाथ पैर पकड़कर टांगते हुए मंदिर परिसर स्थित प्याऊ पर मौजूद डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ के पास ले गये। हद तो तब हो गई जब यहां डॉक्टर ने उनका प्राथमिक उपचार तक नहीं किया और सीधे जिला चिकित्सालय ले जाने की बात कह दी। डॉक्टरों के पास स्ट्रेचर की व्यवस्था नहीं होने के कारण वृद्ध को लोग पुन: हाथ पैर पकड़कर निर्गम द्वार तक लेकर गये। वजन अधिक होने के कारण उन्हें लोगों ने 5 जगह जमीन पर रखा जिसके बाद एम्बुलेंस तक पहुंचे।

यदि समय पर प्राथमिक उपचार मिलता तो संभवत: बच सकती थी वृद्ध की जान
पूरे घटनाक्रम के दौरान करीब 30 मिनट से अधिक समय तक लोग मंदिर परिसर में ही वृद्ध को इधर से उधर टांग कर घुमाते रहे और उन्हें स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ।
महाकाल मंदिर की एम्बुलेंस निर्गम द्वार पर पहुंची जिसमें डालकर द्वारका यादव को जिला चिकित्सालय ले जाया गया जहां परीक्षण के बाद डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक की पेंट से मिले आधार कार्ड, पेन कार्ड व अन्य कागजातों में लिखे मोबाईल नम्बर से परिजनों को फोन लगाया गया। तहसीलदार ने द्वारका के पुत्र धनंजय को मोबाईल पर उनके पिता की मृत्यु की सूचना दी।
