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नानाखेड़ा स्टेडियम को बनाया ओपन वेयर हाउस
क्षमता से दो गुना खरीदी हुई : भंडारण के लिये नहीं बची जगह
जिला सहकारी विपणन संघ और मार्कफेड द्वारा नानाखेड़ा स्टेडियम को खुला वेयर हाउस बनाया जा रहा है। यहां कच्चा कैप बनाकर उस पर गेहूं और चने की बोरिया रखकर बारिश से सुरक्षित की जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि विपणन संघ के माध्यम से मार्कफेड द्वारा की गई सरकारी खरीदी क्षमता से दो गुना हुई है और मानसून सीजन शुरू होने के कारण लाखों मेट्रिक टन गेहूं को सुरक्षित रखना मुश्किल था इस कारण नानाखेड़ा स्टेडियम का उपयोग वेयर हाउस के रूप में किया जा रहा है।
क्षमता 5 लाख मीट्रिक टन, खरीदी 8.5 मीट्रिक टन
शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर प्रदेश में विपणन संघ और मार्कफेड के माध्यम से अनाज की सरकारी खरीदी शुरू की गई थी। प्रदेश में उज्जैन जिला सरकारी खरीदी में पहले स्थान पर आया था। उज्जैन जिले के 175 सेंटरों पर अनाज की खरीदी हुई। जिला विपणन संघ के पास अनाज भंडारण के लिये वेयर हाउस की क्षमता 5 लाख मीट्रिक टन है, जबकि सरकारी खरीदी 8.5 लाख मीट्रिक टन की हुई। ऐसी स्थिति में 3.5 लाख मीट्रिक टन अनाज के भंडारण की व्यवस्था अलग से करना पड़ रही है। मानसून सीजन शुरू हो चुका है और लाखों मीट्रिक टन गेहूं व चने खुले में पड़े है। ऐसी स्थिति में यदि लगातार तेज बारिश होती है तो उक्त अनाज खराब हो सकता है।
दो स्थानों पर बन रहे कच्चे कैप
विपणन संघ और मार्कफेड द्वारा शहर के नानाखेड़ा स्टेडियम और हासामपुरा में कच्चे कैप तैयार किये जा रहे हैं। नागदा, घट्टिया में भी इसी प्रकार के कैप बनाकर अनाज को सुरक्षित करने की तैयारियां की जा रही है।
कैसे बनते हैं कच्च्े कैप
खुले मैदान में गिट्टी की चूरी बिछाकर बोरियों में इसी चूरी को भरकर 1 फीट की हाईट की जाती है। मैदान में जल भराव की स्थिति का आंकलन इंजीनियर द्वारा किया जाता है। उस मान से हाईट का निर्धारण होता है। चूरी से भरी बोरियों को निश्चित हाईट तक रखने के बाद स्टेक तैयार होता है उस पर इनेक्सी शीट बिछाई जाती है। पूरी प्रोसेस के बाद एक स्टेक पर 2800 बोरी अनाज को रखा जाता है और बरसाती से पैक कर दिया जाता है। नानाखेड़ा स्टेडियम में 20 हजार मैट्रिक टन अनाज को इन्हीं कच्चे कैप में रखा जाएगा।
दूसरे जिलों में भी भेज रहे अनाज
मानसून सीजन शुरू होने के साथ ही विपणन संघ और मार्कफेड अधिकारी अनाज को सुरक्षित करने की चिंता में है। अलग-अलग सेंटरों पर खुले में पड़ा लाखों टन अनाज कच्चे कैप बनाकर जहां सुरक्षित करने की कवायद चल रही है वहीं दूसरी ओर जिले से इटारसी, मंडीदीप सहित अन्य जिलों में भी ट्रक व ट्रेनों के माध्यम से भेजा जा रहा है।