- उज्जैन में तपिश का प्रकोप: 40-41°C पर अटका पारा, अगले 4 दिन में और बढ़ेगी गर्मी; स्वास्थ्य विभाग सतर्क, हीट मरीजों के लिए विशेष वार्ड तैयार
- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर सख्ती: मुख्य सचिव ने कहा—समय से पहले पूरे हों काम, बारिश से पहले बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करें; मेडिसिटी, सड़क और पुल निर्माण की भी समीक्षा की
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक के बाद रजत चंद्र-त्रिशूल से सजा बाबा का दिव्य रूप, गूंजे जयकारे
- CM मोहन यादव के विजन को रफ्तार: विक्रम विश्वविद्यालय ने शुरू किया अभियान, फार्मा कंपनियों को जोड़ने और स्टूडेंट्स को स्किल्ड बनाने पर फोकस
- सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज: रेल से आने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था पर फोकस, अधिकारियों ने किया स्टेशनों का निरीक्षण
प्रत्याशियों ने खर्च का हिसाब दिया, निर्वाचन टीम ने बताया लाखों रुपए का अंतर
-आयोग ने 70 लाख रुपए खर्च करने की दी थी छूट
उज्जैन। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार-प्रसार के लिए किए गए खर्च का ब्योरा प्रत्याशियों द्वारा निर्वाचन टीम को दे दिया गया है। हालांकि निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों ने उम्मीदवारों को दिए गए हिसाब और टीम के आंकलन में अंतर बताया है। भाजपा के अनिल फिरोजिया के हिसाब में 30 लाख रुपए तो कांग्रेस के बाबूलाल मालवीय के ब्यौरे में 15 लाख रुपए से ज्यादा का।
चुनाव आयोग ने इस बार प्रचार-प्रसार पर खर्च के लिए 70 लाख रुपए की राशि तय की थी, लेकिन दोनों ही दलों ने इससे भी कम पैसा खर्च किया। जिला निर्वाचन कार्यालय में प्रचार-प्रसर पर खर्च के लिए अलग टीम तैनात की थी, जो हर खर्च पर नजर रख रही थी। टीम की रिपोर्ट के मुताबिक फिरोजिया की ओर से भाजपा द्वारा पेश हिसाब में 30 लाख 35 हजार 545 रुपए का अंतर आ रहा है। फिरोजिया के खर्च का हिसाब रख रहे सीए योगेश भार्गव ने बताया आयोग की टीम ने करीब 15 लाख रुपए का खर्च ऐसा भी जोड़ दिया है, जो किया नहीं गया। जिला व्यय व निगरानी समिति में वे वास्तविक खर्च की रिपोर्ट पेश कर इसे ठीक कराएंगे। कांग्रेस के मालवीय की ओर से सीए अनुभव प्रधान द्वारा खर्च का हिसाब पेश किया गया। निर्वाचन कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें भी 15 लाख 10 हजार 802 रुपए का अंतर आ रहा है। यानी आयोग के हिसाब से इतना खर्च ज्यादा हुआ। हालांकि दोनों ही उम्मीदवार 60 लाख रुपए भी खर्च नहीं कर सके।
इसलिए अंतर आया…
राजनीतिक दलों के चार्टर्ड अकाउंटेंट कहते हैं दरअसल, चुनाव आयोग की टीम ने उन गाड़ियों व प्रचार सामग्रियों को भी जोड़ लिया, जो उम्मीदवार के साथ नहीं थे, लेकिन वे साथ चल रहे थे। टीम ने वीडियोग्राफी कराई और इसके आधार पर खर्च भी जोड़ दिया। वास्तविक स्थिति समिति के सामने पेश करने पर इसे सुधारा जा सकेगा।