- एक्ट्रेस कावेरी प्रियम ने महाकाल की भस्म आरती में की पूजा: बोलीं- यहां की ऊर्जा अद्भुत, 3 साल से आ रहीं उज्जैन!
- स्वस्ति वाचन से खुले पट; भांग-चंदन और पुष्पों से हुआ दिव्य श्रृंगार, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
- महाकाल की भस्म आरती में केंद्रीय मंत्री और क्रिकेटर पहुंचे: धर्मेंद्र प्रधान-उमेश यादव ने किया जलाभिषेक, दोनों ने लिया भगवान का आशीर्वाद
- 21 दिन बाद पहुंचा कनाडा में मारे गए छात्र गुरकीरत का पार्थिव शरीर: CM मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि, सरकार ने उठाया 40-50 लाख का खर्च
- महाकाल पर आज से शीतल जलधारा शुरू, 29 जून तक निरंतर चलेगी शीतल धारा
फिर बदलाव:सांची तैयार करके दे रहा मोदक, चिंतामण गणेश समिति कर रही विक्रय, 250 ग्राम के पैकेट की कीमत 110 रुपए
श्री चिंतामण गणेश मंदिर समिति द्वारा काउंटर लगाकर मोदक विक्रय किए जाने लगे हैं। ये मोदक उज्जैन दुग्ध संघ यानी सांची तैयार करके दे रहा है। अब केवल 250 ग्राम के पैकेट ही ये उपलब्ध है, जिसकी कीमत 110 रुपए है। कोरोना काल के पहले भी ऐसी व्यवस्था अधिकारियों ने मंदिर समिति व सांची के बीच समन्वय करवाकर शुरू करवाई थी लेकिन कुछ ही दिन बाद लॉकडाउन लग गया था और ये प्रक्रिया बंद करना पड़ी थी। हाल ही में गणेश चतुर्थी से पुन: इस व्यवस्था को शुरू किया गया है।
उज्जैन दुग्ध संघ के सीईओ डीपी सिंह ने बताया कि अभी रोजाना केवल 250 ग्राम वजन वाले 200 पैकेट मोदक के समिति को दे रहे हैं। विशेष प्रकार के पैकेट भी सांची के ही हैं। इसमें प्रति मोदक अलग-अलग रखने की व्यवस्था है ताकि वे टूटे नहीं। 250 ग्राम के मोदक की कीमत 110 रुपए हैं। मंदिर समिति के काउंटर से कोई भी श्रद्धालु इन्हें खरीद सकता है।
डिमांड पर 500 ग्राम व एक किलो के पैकेट भी तैयार होंगे
सीईओ सिंह ने बताया कि चूंकि अभी गणेशोत्सव चल रहा है और इस नई व्यवस्था की शुरुआत ही है। लिहाजा केवल 250 ग्राम के ही मोदक पैकिंग कर दिए जा रहे हैं। आगे यदि डिमांड आती है तो 500 ग्राम व एक किलो पैकेट भी तैयार किए जाएंगे।
गुणवत्ता का रखा जा रहा है विशेष ख्याल
मंदिर समिति मोदक प्रसादी का प्रचार-प्रसार करने में जुट गई है। ऐसे में यदि डिमांड बढ़ती है तो प्रसादी भी ज्यादा मात्रा में बनवाई जाने लगेगी। इधर, दुग्ध संघ के सीईओ सिंह ने बताया कि मोदक बनाने में गुणवत्ता का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। वे यह भी बोले कि भविष्य में यदि शहर के अन्य मंदिरों से भी अनुबंध होता है तो वहां के लिए भी प्रसादी बनाने पर दुग्ध संघ विचार करेगा।