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बच्चे खेलने कहां जाए…बगीचे हुए वीरान
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पार्कों की बदहाली इसके सुगम राह में रोड़ा बन रही है।
उज्जैन. नूतन वर्ष में प्रशासन और नगर निगम ने शहर को स्मार्ट बनाने के लिए कमर कस ली है। प्रदेश सरकार भी इसके लिए भरसक प्रयत्नशील है। शहर के विकास के विकास के साथ आधुनिक सुविधा मुहैया करानी की बात हो यह पढ़ाई के लिए एजुकेशन हब हो या फिर शहर के सौन्दर्यीकरण की बात हो, हर मुद्दे पर गंभीरता से मंथन कर कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
ऐसे में शहर की सरकार (नगर निगम) भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने से निश्चित ही शहर को नई पहचान मिलेगी और आम जनता को लाभ होगा। ऐसे में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पार्कों की बदहाली इसके सुगम राह में रोड़ा बन रही है। देखरेख के अभाव में बच्चों की किलकारियों से गूंजने वाले उद्यान अब वीरान होते जा रहे हैं।
जंगली घास में जानवरों का बसेरा
देवास रोड स्थित आदिनाथ कॉलोनी का पार्क नगर निगम की देखरेख के आभाव में वीरान हो चुका है। बच्चों की चहलकदमी से गुलजार रहने वाले पार्क में अब जंगली घास उग आई है। पार्क की बाउंड्रीवॉल भी टूटने लगी है। लोगों ने बदहाल हो रहे पार्क को अब भवन निर्माण सामग्री रखने का अड्डा बना लिया। पार्क में जगह-जगह गिट्टी, ईंट और रेत के ढेर हैं। पार्क में महकदार फूलों की खुशबू अब अनदेखी के कारण खो गई है। गंदगी से अब यहां से दुर्गन्ध आने लगी हैं। रहवासियों ने इसको लेकर पार्षद से कई बार शिकायत की, लेकिन पार्क की दर्शा नहीं सुधरी।
विरोध करने की सजा भुगत रहा पार्क
लक्ष्मी नगर स्थित बलवंत सिंह सिकरवार पार्क पर बदहाली का ग्रहण लग गया है। कभी यहां दिनभर बच्चों का जमावड़ा रहता था। सावन में इमली के पेड़ों में झूले पड़ जाते थे लेकिन नगर निगम की हीलाहवाली से अब पार्क उजाड़ हो गया। यहां लगी हाई मास्ट की लाइट खराब हो चुकी है। पार्क के विकास के नाम पर यहां पुरानी टाइल्स लगाई जा रही थी। स्थानीय जनता के विरोध पर काम तो रुक गया लेकिन तब से पार्क बदहाली पर आंसू बहा रहा है। अब यहां गंदगी पसर रही है। निगम ने जलसंरक्षण के लिए यहां पिट बनाया था, लेकिन मिट्टी को समतल नहीं किया।
अनदेखी से जंग खाकर टूटने लगे झूले
वल्लभ नगर स्थित पार्क भी जिम्मेदारों की अनदेखी का शिकार हो गया है यहां लगे लोहे के झूले जंग खाकर टूट चुके हैं। लोगों के लिए यहां सीमेंट की सीट भी टूट गई है । लोग यहां अब मलबा डालने लगे। रोशनी से जगमगाने वाला पार्क अनदेखी के अंधेरे में खो गया है। देखरेख के अभाव में यहां जंगली घास उग आई है। कीड़े-मकौड़े यहां पनपने लगे हैं । गेट भी क्षतिग्रस्त हो गया है। क्षेत्र में एक ही पार्क होने से यहां के बच्चे अब मायूस होने लगे हैं। इसके विकास के लिए स्थानीय लोगों ने कई बार नगर निगम से शिकायत की लेकिन किसी ने भी उस पर ध्यान नहीं दिया।