- वीरभद्र जी को स्वस्ति वाचन के बाद शुरू हुई भस्म आरती, शेषनाग मुकुट और मुण्डमाला में सजे बाबा महाकाल
- रंगपंचमी पर महाकाल मंदिर में बदली व्यवस्था, भस्म आरती में सिर्फ एक लोटा केसर रंग अर्पित होगा; भक्तों को रंग लाने की नहीं होगी अनुमति!
- महाकाल मंदिर में तड़के हुई भस्म आरती, वीरभद्र जी को स्वस्ति वाचन के बाद खुले गर्भगृह के पट; शेषनाग मुकुट में सजे बाबा महाकाल!
- स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट, महाकाल का हुआ पंचामृत अभिषेक; भांग-चंदन और गुलाब माला से हुआ दिव्य श्रृंगार!
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बाबा महाकाल के आंगन में भक्तो ने खेली फूलो और रंगों की होली
उज्जैन। फाल्गुन पूर्णिमा पर रविवार को होलिका पूजन के साथ रंगपर्व का आगाज हुआ। ज्योतिर्लिंग महाकाल में संध्या आरती के बाद सबसे पहले होलिका दहन हुआ। इसके बाद पुजारी-पुरोहितों ने फाग के गीतों पर फूलों से होली खेली।बाबा महाकाल के आंगन में भक्तो ने खेली फूलो और रंगों की होली| परंपरा के चटख रंग राजा के आगंन से शिप्रा तट तक नजर आए। मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट पर तीर्थ पुरोहितों ने शिप्रा का गुलाल पूजन किया।
पुजारी-पुरोहित परिवार द्वारा महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के साथ मिलकर फाग महोत्सव का आयोजन किया। भजन गायक हरिकिशन साबू (भोंपूजी) नेभजनों से समां बांध दिया। पुजारी-पुरोहित और भक्तों ने मिलकर फूलों से जमकर होली खेली।
शहर में 150 से अधिक स्थानों पर होलिका का पूजन हुआ। प्रदोष काल में महिलाओं ने सुख-सौभाग्य तथा समृद्धि के लिए होलिका का पूजन किया। सोमवार तड़के 4 बजे के बाद शहर में होलिका दहन हुआ|