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बिजली कंपनी की लापरवाही:बिजली कंपनी ने बंद दुकान का बिल 18 हजार तो मजदूर का बिल 2000 रुपए थमाया
महामारी के चलते बिजली उपभोक्ताओं को बिना रीडिंग के बढ़े हुए आए बिल देखकर सकते में हैं, क्योंकि फरवरी और मार्च की तुलना में 20 गुना ज्यादा आए हैं। मंगलवार को एमपीईबी में ऐसे कई उपभोक्ता बिलों को कम कराने के लिए पहुंचे। कंपनी की लापरवाही के चलते मजदूर वर्ग के लोगों को एवरेज बिल दे दिए गए।
बेरछा रोड पर एमपीईबी बिलों की परेशानी लेकर आई महूपुरा निवासी सुनीता जाटव ने बताया वह मजदूर हैं और कर्फ्यू में कोई काम नहीं मिला। इस कारण घर की आर्थिक स्थिति बदतर हो गई है और बिजली कंपनी ने 2000 रुपए का बिल थमा दिया। इसके पहले कभी भी 100 रुपए से ज्यादा का बिल नहीं आया। अब कंपनी वाले बिजली काटने का बोल रहे हैं। इसी तरह नाग नागिन रोड निवासी अशोककुमार हजारीलाल का बिल भी 1800 रुपए का आया है। मार्च में 94 रुपए का ही आया था। इन बिलों को कंपनी कम नहीं कर रही है।
मीटर बदलने को लेकर जिम्मेदार ध्यान दें
बिजली कंपनी की लापरवाही की हद तब हो गई, जब पटवारी कॉलोनी के शिवाजी सोनी ने बताया उनका मीटर नहीं बदला गया, बल्कि रिकॉर्ड में मीटर बदल दिया गया है। इसका बिल भी उनको नहीं दिया है। इसे लेकर परेशान हैं और मंगलवार को एप्लीकेशन देने आया हूं। इस ओर जिम्मेदारों को ध्यान देना चाहिए।
पिछला 3600 मिलाकर आया 21 हजार का बिल
बस स्टैंड पर चाय की दुकान चलाने वाले कमल कुशवाहा ने बताया कि उनकी दुकान 2 माह तक बंद थी। पिछला बकाया 3600 रुपए था, इसके बाद 21000 का बिल आया है। इसमें 18000 रुपए इस बार शामिल किए हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही है। श्यामलाल खत्री निवासी लालपुरा का बिल 88 रु. से ज्यादा बिल कभी नहीं आया। इस बार 2894 रु. का बिल देखकर वे चौंक गए। काछीवाड़ा के हेमंत कुशवाह का बिल भी 15,558 का दिया है और पूछने पर बताया इतने ही जमा करना होंगे। जब इसकी यूनिट 378 है। इसमें हर महीने अगर रीडिंग लेते तो बिल कम ट्रैफिक से बनता और 2000 से ज्यादा का नहीं होता।
मीटर की जांच करेंगे
कर्फ्यू के दौरान कंटेनमेंट एरिया में मीटिंग रीडिंग करने वाले नहीं जा सके। इसलिए कुछ उपभोक्ता की मीटर रीडिंग नहीं हुई है। उनकी परेशानी दूर कर रहे हैं। मीटर रिकॉर्ड में दर्ज है और बदला नहीं गया तो हो सकता है किसी का बदला हो, इसकी जांच करवा रहा हूं।
-बलराज तिवारी, एई बिजली कंपनी