- श्रावण में उज्जैन आने वाले हर श्रद्धालु का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए होगा देश का सबसे बड़ा सर्वे
- श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भस्म आरती शृंगार दर्शन 10-07-2026
- सिंहस्थ-2028 की तैयारी को मिलेगी नई रफ्तार, उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन परियोजना को केंद्र से हरी झंडी
- नागदा में चंबल नदी का जलस्तर बढ़ा, चारों डैम हुए ओवरफ्लो; मां चामुंडा मंदिर तक पहुंचा नदी का पानी
- श्रावण में किस रास्ते से निकलेगी बाबा महाकाल की सवारी? मार्ग को लेकर बढ़ी उत्सुकता, भक्तों ने प्रशासन से मांगी स्पष्ट जानकारी
भेड़ चराने के लिए 35 हजार में सात बच्चों को राजस्थान से खरीदा, चंदूखेड़ी के जंगल से मुक्त कराया
उज्जैन | पाली राजस्थान के सात बच्चाें को 35 हजार में गड़रियों ने माता-पिता से खरीदा व उज्जैन लाकर उनसे भेड़े चरवा रहे थे। चाइल्ड लाइन को जन साहस देवास के माध्यम से बच्चों को बंधक बनाकर काम करवाने की सूचना मिली। इसके बाद चाइल्ड लाइन, महिला सशक्तिकरण, श्रम विभाग, विशेष किशोर पुलिस इकाई व बाल सहायता प्रकोष्ठ की टीम ने बड़नगर रोड चंदूखेड़ी के जंगलों में दबिश दी। यहां सातों बच्चे काम करते मिले, जिन्हें आजाद कराया व उन्हें खरीदने वाले गड़रियों को महाकाल पुलिस के हवाले किया। बुधवार शाम को कार्रवाई के लिए टीम चंदूखेड़ी पहुंची तो पता चला खरीदे गए बच्चों को बंधक बनाकर रखा है व उनसे कई घंटे काम करवाया जाता है। बच्चों की उम्र 8 से 15 साल है। सभी बच्चे ढाई साल से गड़रिए थानाराम निवासी धोलपुर के कब्जे में थे। चाइल्ड लाइन के केन्द्र समन्वयक नरेंद्रसिंह सेंगर ने बताया बच्चे चाइल्ड लाइन की देखभाल में है। परिजनों को सूचना दी है, उनके आने पर उन्हें सुपुर्द करेंगे। मजदूर परिवार द्वारा गरीबी के चलते बच्चों को सालभर के लिए चार से पांच हजार में बेच देने की यह पहली घटना नहीं है। केन्द्र समन्वयक सेंगर के मुताबिक 6 अप्रैल 2016 को इसी तरह कायथा से छह बच्चों को छुड़ाया था। वे भी राजस्थान के ही निवासी थे।