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महाअष्टमी पर नगर पूजा
भक्तों में उत्साह….27 किलोमीटर का दायरा 40 से अधिक मंदिरों में पूजा
उज्जैन।दो वर्ष के अंतराल के बाद चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी पर शनिवार को निरंजनी अखाड़े की ओर से नगर पूजा की गई। चौबीस खंभा माता मंदिर से प्रारंभ नगर पूजा में 40 से अधिक मंदिरों में पूजन किया जा रहा है।
उज्जैन। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी को आज सुबह 8 बजे श्रद्धा और उत्साह के साथ नगर पूजा चौबीसखंबा माता मंदिर पर हुई। इसके बाद 27 किलोमीटर के दायरे में मदिरा की धार छोड़ी जा रही हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु भी शामिल हुए। नगर पूजा रात 8 बजे पूरी होगी। 40 मंदिरों में पूजा और भोग लगाया जाएगा।
नगर पूजा का आयोजन शासन द्वारा शारदीय नवरात्रि में किया जाता है। मगर पांच वर्ष पूर्व चैत्र माह में इसकी शुरुआत निरंजनी अखाड़े ने की थी। कोरोनाकाल के कारण दो वर्ष नगर पूजा नहीं हो पाई थी।
आज सुबह 8 बजे चौबीस खंबा माता मंदिर पर अभा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत रवींद्रपुरी महाराज ने माता महालया और माता महामाया को मदिरा का भोग लगाकर नगर पूजा की शुरुआत की।
इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु भी मौजूद थे। चौबीस खंबा मंदिर पर पूजन के बाद 27 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए 40 मंदिरों में पूजा की जा रही हैं।
इस दौरान नगर के देवी, भैरव और हनुमान मंदिरों में पूजा के साथ भोग लगाया। रात 8 बजे हांडीफोड़ भैरव मंदिर पर पूजा का समापन होगा। इधर घरों में भी आज महाअष्टमी पर कुलदेवी का पूजन किया जा रहा है।
इसलिए होती है नगर पूजा….मान्यता है कि सम्राट विक्रमादित्य ने नगर को आपदाओं से बचाने के लिए शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी को नगर पूजा की शुरुआत की थी।
सिंहस्थ में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी को नगर पूजा होती है। लेकिन वर्ष 2017 से निरंजनी अखाड़े द्वारा चैत्र नवरात्रि में नगर पूजा शुरू की। तब से ही आयोजन प्रतिवर्ष किया जा रहा है। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण दो वर्ष पूजा नहीं हो पाई थी।


