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महाकाल मंदिर में कलेक्टर ने चलाई तलवार:उत्तम वर्षा के लिए महाकाल मंदिर में चल रहे महारूद्र अनुष्ठान का समापन
उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को उत्तम वर्षा की कामना के साथ शुरू हुए महारूद्राभिषेक अनुष्ठान का समापन हवनात्मक आहूति के साथ हुआ। कलेक्टर आशीष सिंह ने यज्ञशाला के बाहर तलवार से कद्दू काटकर बलि दी। इसके बाद हवन की पूर्णाहूति हुई।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के आंगन में 23 जून से देश, प्रदेश व नगर में उत्तम वर्षा की कामना से मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष कलेक्टर आशीष सिंह ने सपत्निक भगवान महाकाल तथा श्रृंगी ऋषि का पूजन कर महारूद्राभिषेक अनुष्ठान का शुभारंभ किया था। पांच दिन भगवान महाकाल व श्रृंगी ऋषि पर सहस्त्र जलधारा प्रवाहित की गई। मंदिर के पुजारी-पुरोहित सहित अन्य 55 पंडितों ने नंदी मंडपम् में बैठकर पर्जन्य मंत्रों का जाप किया। यह क्रम 27 जून तक प्रतिदिन सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक किया गया। अनुष्ठान का समापन पूर्णाहुति के साथ हुआ
पूर्णाहुति पर कलेक्टर ने तलवार चलाई
सोमवार को दोपहर में हवनात्मक पूर्णाहुति के लिए कलेक्टर आशीष सिंह महाकाल मंदिर पहुंचे थे। यज्ञशाला के बाहर कलेक्टर सिंह ने अनुष्ठान में कामना की पूर्ति के लिए सफेद कद्दू को तलवार से काटकर बलि देकर अनुष्ठान की पूर्णाहुति की। मंदिर के आशीष पुजारी ने बताया कि भगवान महाकाल को महारूद्र अभिषेक का शास्त्र में बड़ा महत्व है। शिव के बड़ा प्रिय है। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा राष्ट्र के कल्याण के लिए और उत्तम वर्षा की कामना के साथ महारूद्राभिषेक अनुष्ठान का हवनात्मक समापन किया है। इस दौरान महाकाल के अधिकारी व पुजारी-पुरोहित मौजूद थे।
श्रृंगी ऋषि के आव्हान से इंद्र देव प्रसन्न होते है
अनुष्ठान के आचार्य पं.घनश्याम शर्मा ने बताया पर्जन्य अनुष्ठान में श्रृंगी ऋ षि का विशेष महत्व है। श्रृंगी ऋषि के मस्तक पर जन्म से ही सींग था, जिसके कारण उनका नाम श्रृंगी पड़ा। श्रृंगी ऋ षि के आव्हान से इंद्र देव प्रसन्न होते हैं तथा उत्तम वर्षा करते हैं। इसीलिए श्रृंगी ऋ षि की मूर्ति पर भी भगवान महाकाल के साथ सतत जलधारा प्रवाहित कर अभिषेक किया जा जाता है।